रात Poetry (page 76)

हम ने देखा है इतने खंडर ख़्वाब में

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

शाम होती है तो लगता है कोई रूठ गया

अशफ़ाक़ नासिर

मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना

अशफ़ाक़ नासिर

अक्स को फूल बनाने में गुज़र जाती है

अशफ़ाक़ नासिर

हंगाम-ए-शब-ओ-रोज़ में उलझा हुआ क्यूँ हूँ

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल इक नई दुनिया-ए-मआनी से मिला है

अशफ़ाक़ हुसैन

ना-तमामी के शरर में रोज़ ओ शब जलते रहे

अशअर नजमी

सुकूत-ए-शब के हाथों सोंप कर वापस बुलाता है

अशअर नजमी

इस सफ़र में नीम-जाँ मैं भी नहीं तू भी नहीं

अशअर नजमी

हम तह-ए-दरिया तिलिस्मी बस्तियाँ गिनते रहे

अशअर नजमी

दैर-ओ-हरम भी आए कई इस सफ़र के बीच

अाशा प्रभात

रौनक़ तिरे कूचे की बढ़ाने चले आए

असग़र राही

इक शख़्स अपने हाथ की तहरीर दे गया

असग़र राही

दम तोड़ती है शाम की नीली हवा

असग़र नदीम सय्यद

ऐ ख़ामोशी

असग़र नदीम सय्यद

सराए

असग़र मेहदी होश

हम दश्त से हर शाम यही सोच के घर आए

असग़र गोरखपुरी

रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते

असग़र गोंडवी

मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा

असग़र गोंडवी

वो उन का हिजाब और नज़ाकत के नज़ारे

असर रामपुरी

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है

असद मुल्तानी

मलाल-ए-हिज्र नहीं रंज-ए-बे-रुख़ी भी नहीं

असद जाफ़री

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री

हवा के पास बस इक ताज़ियाना होता है

असअ'द बदायुनी

हवा हवस के इलाक़े दिखा रही है मुझे

असअ'द बदायुनी

अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ भी थी परवाना भी

आरज़ू लखनवी

अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ' भी थी परवाना भी

आरज़ू लखनवी

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