व्यक्ति Poetry (page 4)

हम अजनबी हैं आज भी अपने दयार में

वहीदा नसीम

रौशन हों दिल के दाग़ तो लब पर फ़ुग़ाँ कहाँ

वहीदा नसीम

हर एक गाम पे सज्दा यहाँ रवा होगा

वहीदा नसीम

हम को मंज़ूर तुम्हारा जो न पर्दा होता

वहीद अख़्तर

खिलौने

वहीद अहमद

उस एक शख़्स का कोई पता नहीं मिलता

विशाल खुल्लर

मुझ से कब उस को मोहब्बत थी मगर मेरे बा'द

विपुल कुमार

न हम-सफ़र है न हम-नवा है

विकास शर्मा राज़

मिरी वफ़ा की मुकम्मल तू दास्ताँ कर दे

विजय शर्मा अर्श

इश्क़ ने बरबाद कर दी ज़िंदगी हाए रे इश्क़

विजय अरुण

वही हादसों के क़िस्से वही मौत की कहानी

वफ़ा बराही

अक्सर मिरी ज़मीं ने मिरे इम्तिहाँ लिए

उषा भदोरिया

वो ख़्वाब ही सही पेश-ए-नज़र तो अब भी है

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

नज़र न आए तो क्या वो मिरे क़यास में है

उम्मीद फ़ाज़ली

हाए इक शख़्स जिसे हम ने भुलाया भी नहीं

उम्मीद फ़ाज़ली

जिस आईने में भी झाँका नज़र उसी से मिली

उमर अंसारी

हर इक का दर्द उसी आशुफ़्ता-सर में तन्हा था

उमर अंसारी

एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले

उमैर नजमी

हर बार ही मैं जान से जाने में रह गया

उमैर मंज़र

दिल ने फिर चाहा उजाले का समुंदर होना

तुफ़ैल चतुर्वेदी

ताइर-ए-ख़ुश-रंग को बे-बाल-ओ-पर देखेगा कौन

तुफ़ैल अहमद मदनी

उम्र भर लड़ता रहा हूँ उस से

त्रिपुरारि

एक तस्वीर बनाई है ख़यालों ने अभी

त्रिपुरारि

उस ने ख़ुद फ़ोन पे ये मुझ से कहा अच्छा था

त्रिपुरारि

अश्क-दर-अश्क वही लोग रवाँ मिलते हैं

त्रिपुरारि

हर इक के दुख पे जो अहल-ए-क़लम तड़पता था

तिफ़्ल दारा

ज़र का बंदा हो कि महरूमी का मारा हुआ शख़्स

तौक़ीर तक़ी

याद और ग़म की रिवायात से निकला हुआ है

तौक़ीर तक़ी

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