शाम Poetry (page 10)

कहीं से तुम मुझे आवाज़ देती हो

ताबिश कमाल

बे-घरी

ताबिश कमाल

ज़िंदगी दिल पे अजब सेहर सा करती जाए

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

वो रौशनी कि ब-क़ैद-ए-सहर नहीं ऐ दोस्त

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

नुमू के फ़ैज़ से रंग-ए-चमन निखर सा गया

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

हर मोड़ को चराग़-ए-सर-ए-रहगुज़र कहो

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

ग़म में रोता हूँ तिरे सुब्ह कहीं शाम कहीं

ताबाँ अब्दुल हई

मंज़िलों उस को आवाज़ देते रहे मंज़िलों जिस की कोई ख़बर भी न थी

ताब असलम

दिल के सहरा में बड़े ज़ोर का बादल बरसा

ताब असलम

दुखों की वादी में हर शाम का गुज़र ऐसे

सय्यदा ज़िया ख़ालिदा

कभी कभी तिरी चाहत पे ये गुमाँ गुज़रा

सय्यदा शान-ए-मेराज

खिड़कियाँ खोल लूँ हर शाम यूँही सोचों की

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

ये फ़ना मेरी बक़ा हो जैसे

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

सुब्ह को शाम लिख दिया मैं ने

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

हर-सू ख़ुशबू को फ़ज़ाओं में बिखरता देखूँ

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

साहब की बिपता

सय्यद ज़मीर जाफ़री

यूँ क़त्ल-ए-आम नौ-ए-बशर कर दिया गया

सय्यद ज़मीर जाफ़री

हम अगर दश्त-ए-जुनूँ में न ग़ज़ल-ख़्वाँ होते

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अगर हम दश्त-ए-जुनूँ में न ग़ज़ल-ख़्वाँ होते

सय्यद ज़मीर जाफ़री

ले के अपनी ज़ुल्फ़ को वो प्यारे प्यारे हाथ में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ये शबनम फूल तारे चाँदनी में अक्स किस का है

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

दिल का दरवाज़ा खुला हो जैसे

सय्यद मुनीर

उन की देरीना मुलाक़ात जो याद आती है

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

जश्न बरबाद ख़यालों का मना लूँ तो चलूँ

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

ज़्याबतीस के मरीज़

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

ईद की ख़रीदारी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

आदमी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

दर्द थमता ही नहीं सीने में आराम के बा'द

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

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