सूरज Poetry (page 5)

इक अनोखी रस्म को ज़िंदा रखा है

ताहिर अज़ीम

Dimensions

ताबिश कमाल

बे-घरी

ताबिश कमाल

कड़वे तल्ख़ कसीले ज़ाइक़े

तबस्सुम काश्मीरी

इस अहद की बे-हिस साअ'तों के नाम

तबस्सुम काश्मीरी

एक लम्बी काफ़िर लड़की

तबस्सुम काश्मीरी

तुझ से टूटा रब्त तो फिर और क्या रह जाएगा

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

इंसान की हालत पर अब वक़्त भी हैराँ है

सय्यद सग़ीर सफ़ी

ऐब्स्ट्रैक्ट आर्ट

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

एक इश्क़ की नस्ली तारीख़

सय्यद काशिफ़ रज़ा

सुख़न की शब लहू होती रहेगी

सय्यद अमीन अशरफ़

न जाने रौज़न-ए-दीवार क्या जादू जगाता है

सय्यद अमीन अशरफ़

मुनव्वर और मुबहम इस्तिआरे देख लेता हूँ

सय्यद अमीन अशरफ़

किसी ख़याल की रौ में था मुस्कुराते हुए

सय्यद अमीन अशरफ़

है इर्तिबात-शिकन दाएरों में बट जाना

सय्यद अमीन अशरफ़

था आईने के सामने चेहरा खुला हुआ

सय्यद अहमद शमीम

कितने जुग बीत गए फिर भी न भूला जाए

सय्यद अहमद शमीम

एक जग बीत गया झूम के आए बादल

सय्यद अहमद शमीम

ये धूप गिरी है जो मिरे लॉन में आ कर

स्वप्निल तिवारी

मुँह अँधेरे तेरी यादों से निकलना है मुझे

स्वप्निल तिवारी

जिस में इक सहरा था इक दीवाना था

स्वप्निल तिवारी

धीरे धीरे ढलते सूरज का सफ़र मेरा भी है

स्वप्निल तिवारी

हर क़दम साँपों की आहट और मैं

सालेह नदीम

जिन के अंदर चराग़ जलते हैं

सूर्यभानु गुप्त

सुनी है रौशनी के क़त्ल की जब से ख़बर मैं ने

सुरूर अम्बालवी

तुझ में सब मंज़र महफ़ूज़

सुलतान सुबहानी

अपने ही टूटे हुए ख़्वाबों को दिल चुनता भी है

सुल्तान सब्र वानी

धूप की शिद्दत में नंगे पाँव नंगे सर निकल

सुलतान रशक

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