मामला Poetry (page 6)

सुख़न जिन के कि सूरत जूँ गुहर है बहर-ए-मअ'नी में

वलीउल्लाह मुहिब

दीं से पैदा कुफ़्र है और नूर शक्ल-ए-नार है

वलीउल्लाह मुहिब

ब-मअ'नी कुफ़्र से इस्लाम कब ख़ाली है ऐ ज़ाहिद

वलीउल्लाह मुहिब

राएगाँ औक़ात खो कर हैफ़ खाना है अबस

वलीउल्लाह मुहिब

ब-तस्ख़ीर-बुताँ तस्बीह क्यूँ ज़ाहिद फिराते हैं

वलीउल्लाह मुहिब

आना है तो आ जाओ यक आन मिरा साहब

वलीउल्लाह मुहिब

असीरी बे-मज़ा लगती है बिन-सय्याद क्या कीजे

वली उज़लत

मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा

वली मोहम्मद वली

किसी सूरत कोई सूरत निकालो

वकील अख़्तर

मैं नाम-लेवा हूँ तेरा तू मो'तबर कर दे

वकील अख़्तर

याद में अपने यार-ए-जानी की

वाजिद अली शाह अख़्तर

सुन रक्खो उसे दिल का लगाना नहीं अच्छा

वाजिद अली शाह अख़्तर

जा बैठते हो ग़ैरों में ग़ैरत नहीं आती

वाजिद अली शाह अख़्तर

अपने अंदाज़ में औरों से जुदा लगते हो

वजीह सानी

चाहतों की जो दिल को आदत है

वजद चुगताई

शर्मिंदा किया जौहर-ए-बालिग़-नज़री ने

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

किसी सूरत से उस महफ़िल में जा कर

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

ऐ अहल-ए-वफ़ा ख़ाक बने काम तुम्हारा

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

दावत-ए-इंक़िलाब

वहीदुद्दीन सलीम

ग़ैर-मुमकिन है कि मिट जाए सनम की सूरत

वाहिद प्रेमी

कतरा के गुल्सिताँ से जो सू-ए-क़फ़स चले

वहीद अख़्तर

क्या ख़ला आसमान था पहले

विशाल खुल्लर

अजब सी आज-कल मैं इक परेशानी में हूँ यारो

विनीत आश्ना

कार्बन-पेपर

वर्षा गोरछिया

जाने किस किस ने हमें ताकीद की

उर्मिलामाधव

परेशाँ हो के दिल तर्क-ए-तअल्लुक़ पर है आमादा

उनवान चिश्ती

मिरे शानों पे उन की ज़ुल्फ़ लहराई तो क्या होगा

उनवान चिश्ती

आज अचानक फिर ये कैसी ख़ुशबू फैली यादों की

उनवान चिश्ती

किसी से और तो क्या गुफ़्तुगू करें दिल की

उम्मीद फ़ाज़ली

हम तिरा अहद-ए-मोहब्बत ठहरे

उम्मीद फ़ाज़ली

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