वफ़ा Poetry (page 46)

काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या से क्या कर दिया

फ़ना बुलंदशहरी

ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके

फ़ना बुलंदशहरी

बोला हैं रंग कितने ज़माने के और भी

फ़ाख़िरा बतूल

तपता सूरज शाम को ढल जाएगा

फ़ैज़ी सम्बलपुरी

कोई तसव्वुर में जल्वा-गर है बहार दिल में समा रही है

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

ग़म-ए-जानाँ के सिवा कुछ हमें प्यारा न हुआ

फ़ैज़ी निज़ाम पुरी

सुब्ह-ए-नौ लाती है हर शाम तुम्हें क्या मा'लूम

फ़ैज़ुल हसन

जो तलब पे अहद-ए-वफ़ा किया तो वो आबरू-ए-वफ़ा गई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस दयार-ए-अदम में...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वासोख़्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शोरिश-ए-ज़ंजीर बिस्मिल्लाह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

पाँव से लहू को धो डालो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

निसार मैं तेरी गलियों के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मरसिए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मेजर-इसहाक़ की याद में

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मदह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कोई आशिक़ किसी महबूबा से!

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़त्म हुई बारिश-ए-संग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम तो मजबूर-ए-वफ़ा हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दस्त-ए-तह-ए-संग-आमदा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दर-ए-उमीद के दरयूज़ा-गर

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ हबीब-ए-अम्बर-दस्त!

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

याद-ए-ग़ज़ाल-चश्माँ ज़िक्र-ए-समन-अज़ाराँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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