वफ़ा Poetry (page 48)

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

इश्क़ की दुनिया में इक हंगामा बरपा कर दिया

एहसान दानिश

आया नहीं है राह पे चर्ख़-ए-कुहन अभी

एहसान दानिश

ज़ोम का ही तो आरिज़ा है मुझे

डॉक्टर आज़म

हर शख़्स में कुछ लोग कमी ढूँड रहे हैं

डॉक्टर आज़म

हज़ारों बार कह कर बेवफ़ा को बा-वफ़ा मैं ने

दिवाकर राही

आइने से कब तलक तुम अपना दिल बहलाओगे

दिनेश ठाकुर

पूछता कौन वफ़ा से उस की

दिनेश नायडू

उट्ठी नहीं है शहर से रस्म-ए-वफ़ा अभी

दिलावर फ़िगार

मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है

दिल शाहजहाँपुरी

कहाँ गई एहसास की ख़ुशबू फ़ना हुए जज़्बात कहाँ

देवमणि पांडेय

ज़ीस्त बे-वादा-ए-अनवार-ए-सहर है कि जो थी

द्वारका दास शोला

मेरी मंज़िल कहाँ है क्या मा'लूम

द्वारका दास शोला

देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर

द्वारका दास शोला

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद

द्वारका दास शोला

दर्पन दिया हूँ दिल का मैं उस दिलरुबा के हाथ

दाऊद औरंगाबादी

वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी

दर्शन सिंह

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

जब आदमी मुद्दआ-ए-हक़ है तो क्या कहें मुद्दआ' कहाँ है

दर्शन सिंह

इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी

दर्शन सिंह

कहते न थे हम 'दर्द' मियाँ छोड़ो ये बातें

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है

दानिश फ़राही

न सोचें अहल-ए-ख़िरद मुझ को आज़माने को

दानिश फ़राही

हश्र इक गुज़रा है वीराने पे घर होने तक

दानिश फ़राही

दिल था बे-कैफ़ मोहब्बत की ख़ता से पहले

दानिश फ़राही

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