याद Poetry (page 40)

ज़िंदगी जब से शनासा-ए-मुहालात हुई

रविश सिद्दीक़ी

वो निकहत-ए-गेसू फिर ऐ हम-नफ़साँ आई

रविश सिद्दीक़ी

पास-ए-वहशत है तो याद-ए-रुख़-ए-लैला भी न कर

रविश सिद्दीक़ी

नक़ाब-ए-शब में छुप कर किस की याद आई समझते हैं

रविश सिद्दीक़ी

ख़ल्वती-ए-ख़याल को होश में कोई लाए क्यूँ

रविश सिद्दीक़ी

कौन कहता मुझे शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-जुनूँ

रविश सिद्दीक़ी

ज़िंदगी के कैसे कैसे हौसले पथरा गए

रौनक़ रज़ा

हमारी जीत यही थी कि ख़ुद से हार आए

रौनक़ रज़ा

दरवाज़ा मायूस है शायद सोग में है अँगनाई बहुत

रौनक़ नईम

इन आँखों में बसा कोई ज़ोहरा-जबीं है अब

रऊफ़ यासीन जलाली

क़रीब भी तो नहीं हो कि आ के सो जाओ

रउफ़ रज़ा

नाश्ते पर जिसे आज़ाद किया है मैं ने

रउफ़ रज़ा

कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे

रउफ़ रज़ा

जितना पाता हूँ गँवा देता हूँ

रउफ़ रज़ा

हर मौसम में ख़ाली-पन की मजबूरी हो जाओगे

रउफ़ रज़ा

शेवा-ए-ज़ब्त को रुस्वा दिल-ए-नाशाद न कर

रसूल जहाँ बेगम मख़फ़ी बदायूनी

दोस्त के शहर में जब मैं पहुँचा शहर का मंज़र अच्छा था

रासिख़ फारानी

न जाने कब बसर हुए न जाने कब गुज़र गए

रशक खलीली

ये उम्र गुज़री है इतने सितम उठाने में

राशिद तराज़

लोग पत्थर के थे फ़रियाद कहाँ तक करते

राशिद तराज़

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

कोई रस्ता कोई रहरव कोई अपना नहीं मिलता

राशिद क़य्यूम अनसर

हर ख़ुशी तेरे नाम की मैं ने

राशिद क़य्यूम अनसर

ग़ौर करो तो चेहरा चेहरा ओढ़े गहरे गहरे रंग

राशिद मतीन

कोई साया न शजर याद आया

राशिद हामिदी

तेरी आवाज़

राशिद अनवर राशिद

क्या कोई याद तिरे दिल को दुखाती है हवा

राशिद अनवर राशिद

अब तो इक पल के लिए भी न गंवाएँगे तुम्हें

राशिद अनवर राशिद

इंकिशाफ़

राशिद आज़र

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