ज़ुल्फ़ Poetry (page 4)

क्या क्या मज़े से रात की अहद-ए-शबाब में

मीर तस्कीन देहलवी

बे-मेहर कहते हो उसे जो बेवफ़ा नहीं

मीर तस्कीन देहलवी

ख़्वाब तो ख़्वाब है ता'बीर बदल जाती है

तनवीर अहमद अल्वी

फ़िशार-ए-हुस्न से आग़ोश-ए-तंग महके है

तनवीर अहमद अल्वी

दिल है पलकों में सिमट आता है आँसू की तरह

तनवीर अहमद अल्वी

नज़ारगी-ए-शौक़ ने दीदार में खींचा

तालीफ़ हैदर

न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है

तहज़ीब हाफ़ी

जिस ने तेरी याद में सज्दे किए थे ख़ाक पर

ताहिर फ़राज़

कड़वे तल्ख़ कसीले ज़ाइक़े

तबस्सुम काश्मीरी

वो नाज़ुक सा तबस्सुम रह गया वहम-ए-हसीं बन कर

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

तुम से अब कामयाब और ही है

ताबाँ अब्दुल हई

शब को फिरे वो रश्क-ए-माह ख़ाना-ब-ख़ाना कू-ब-कू

ताबाँ अब्दुल हई

मरने की मुझ को आप से हैं इज़तिराबियाँ

ताबाँ अब्दुल हई

हुए हैं जा के आशिक़ अब तो हम उस शोख़ चंचल के

ताबाँ अब्दुल हई

आई बहार शोरिश-तिफ़लाँ को क्या हुआ

ताबाँ अब्दुल हई

याद-ए-अय्याम कि हम-रुतबा-ए-रिज़वाँ हम थे

तअशशुक़ लखनवी

ता-सहर की है फ़ुग़ाँ जान के ग़ाफ़िल मुझ को

तअशशुक़ लखनवी

कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

तअशशुक़ लखनवी

तूफ़ाँ नहीं गुज़रे कि बयाबाँ नहीं गुज़रे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

थी आसमाँ पे मेरी चढ़ाई तमाम रात

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ले के अपनी ज़ुल्फ़ को वो प्यारे प्यारे हाथ में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

आशिक़-ए-हक़ हैं हमीं शिकवा-ए-तक़दीर नहीं

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

साँस का अपनी रग-ए-जाँ से गुज़र होने तक

सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

न हो तू जिस में वो दिल भी है क्या दिल

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

मेरी निगह में यार मैं उस की निगाह में

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

इश्क़ में कुछ इस तरह दीवानगी छाई कि बस

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

तर्ज़-ए-नौ की शाएरी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

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