आग Poetry (page 17)

क्या आतिश-ए-फ़ुर्क़त ने बुरी पाई है तासीर

सख़ी लख़नवी

ज़हर का सफ़र

सज्जाद बाक़र रिज़वी

फेरी वाला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ख़्वाहिश में सुकूँ की वही शोरिश-तलबी है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

जहाँ में रह के भी हम कब जहाँ में रहते हैं

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ऐसी आग फ़लक से बरसेगी इक दिन

साजिद हमीद

आँखों को ख़्वाब-नाक बनाना पड़ा मुझे

साइम जी

अपने अंजाम से बे-ख़बर ज़िंदगी

सैलानी सेवते

ख़ुशबू है शरारत है रंगीन जवानी है

सैफ़ी प्रेमी

तन्हाई के शो'लों पे मचलने के लिए था

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

अब क्या गिला करें कि मुक़द्दर में कुछ न था

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

ज़मीं ने ख़ून उगला आसमाँ ने आग बरसाई

साहिर लुधियानवी

तुलू-ए-इश्तिराकियत

साहिर लुधियानवी

शहज़ादे

साहिर लुधियानवी

गुरेज़

साहिर लुधियानवी

तरब-ज़ारों पे क्या बीती सनम-ख़ानों पे क्या गुज़री

साहिर लुधियानवी

तरब-ज़ारों पे क्या बीती सनम-ख़ानों पे क्या गुज़री

साहिर लुधियानवी

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागर से हम

साहिर लुधियानवी

मुझ को वीरान सी रातों में जगाने वाले

साहिबा शहरयार

गूँज मिरे गम्भीर ख़यालों की मुझ से टकराती है

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

ज़र्द सूरज

सहर अंसारी

अलाव

सहर अंसारी

हम अहल-ए-ज़र्फ़ कि ग़म-ख़ाना-ए-हुनर में रहे

सहर अंसारी

पूछा किसी ने हाल किसी का तो रो दिए

साग़र सिद्दीक़ी

हर मरहला-ए-शौक़ से लहरा के गुज़र जा

साग़र सिद्दीक़ी

हम आँखों से भी अर्ज़-ए-तमन्ना नहीं करते

साग़र निज़ामी

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