बाहर Poetry (page 6)

मैं एक आँसू इकट्ठा कर रहा हूँ

सय्यद काशिफ़ रज़ा

आज़ादी का महल्ल-ए-वक़ूअ'-1

सय्यद काशिफ़ रज़ा

ठीक है उजली याद का रिश्ता अपने दिल से टूटा भी

सय्यद अारिफ़

ये कैसे ख़ौफ़ हमें आज फिर सताने लगे

सय्यद अनवार अहमद

जो डर अपनों से है ग़ैरों से वो डर हो नहीं सकता

सय्यद अमीन अशरफ़

तुम मिरे पास रहो जिस्म की गरमी बख़्शो

सय्यद अहमद शमीम

जिस में इक सहरा था इक दीवाना था

स्वप्निल तिवारी

चारों ओर समुंदर है

स्वप्निल तिवारी

जिन के अंदर चराग़ जलते हैं

सूर्यभानु गुप्त

पदमनी

सुरूर जहानाबादी

मैं दिन को रात के दरिया में जब उतार आया

सूरज नारायण

आँख लग जाती है फिर भी जागता रहता हूँ मैं

सूरज नारायण

क्या ये ही है मेरी दुनिया मैं जिस से वाबस्ता हूँ

सुनील कुमार जश्न

रौशनी क्या पड़ी है कमरे में

सुनील आफ़ताब

मेरे ख़ुश-आइंद-मुस्तक़बिल का पैग़म्बर भी तू

सुलतान रशक

धूप की शिद्दत में नंगे पाँव नंगे सर निकल

सुलतान रशक

आइनों में अक्स बिन कर जिन के पैकर आ गए

सुलतान निज़ामी

दस्तार-ए-एहतियात बचा कर न आएगा

सुल्तान अख़्तर

कोई दिया किसी चौखट पे अब न जलने का

सुलेमान ख़ुमार

तिरा दिल तो नहीं दिल की लगी हूँ

सुलैमान अरीब

इस ज़मीन ओ आसमाँ पर ख़ाक डाल

सुहैल अख़्तर

आँखों को मयस्सर कोई मंज़र ही नहीं था

सुहैल अहमद ज़ैदी

धुँद

सुबोध लाल साक़ी

सुनहरा ही सुनहरा वादा-ए-फ़र्दा रहा होगा

सुबोध लाल साक़ी

ख़ुद-कुशी करने का अगला मंसूबा

सिदरा सहर इमरान

सफ़र की धूप ने चेहरा उजाल रक्खा था

सिदरा सहर इमरान

कुछ ऐसी टूट के शहर-ए-जुनूँ की याद आई

सिद्दीक़ शाहिद

खा के तेग़-ए-निगह-ए-यार दिल-ए-ज़ार गिरा

शऊर बलगिरामी

कुछ नहीं बोला तो मर जाएगा अंदर से 'शुजाअ'

शुजा ख़ावर

तकल्लुफ़ छोड़ कर मेरे बराबर बैठ जाएगा

शुजा ख़ावर

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