बात Poetry (page 48)

हम अजल के आने पर भी तिरा इंतिज़ार करते

रशीद लखनवी

है अंधेरा तो समझता हूँ शब-ए-गेसू है

रशीद लखनवी

गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं

रशीद लखनवी

रिश्ता-ए-दिल भी किसी दिन ख़्वाब सा हो जाएगा

रशीद कामिल

राह में क़दमों से जो लिपटी सफ़र की धूल थी

रशीद अफ़रोज़

वो ख़ुश किसी के साथ हैं ना-ख़ुश किसी के साथ

रसा रामपुरी

वो ख़ुश किसी के साथ हैं ना-ख़ुश किसी के साथ

रसा रामपुरी

पी के कर लेता हूँ तौबा जब से ये दस्तूर है

रसा रामपुरी

कौन सा इश्क़-ए-बुताँ में हमें सदमा न हुआ

रसा रामपुरी

दुश्मन की बात जब तिरी महफ़िल में रह गई

रसा रामपुरी

आज मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू है हयात

रसा चुग़ताई

तिरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ

रसा चुग़ताई

जब तक दौर-ए-जाम चलेगा

रसा चुग़ताई

हम ने तो इस इश्क़ में यारो खींचे हैं आज़ार बहुत

रसा चुग़ताई

चराग़-ए-सुब्ह से शाम-ए-वतन की बात करो

रसा चुग़ताई

सर से उतरे नहीं फूल मंज़िल की धुन हम-सफ़र बात सुन

रऊफ़ अमीर

तुझ को आती है दिलासे की नहीं बात कोई

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

मेरे ख़त का जवाब आया था

राणा गन्नौरी

भला कह दिया या बुरा कह दिया

राणा गन्नौरी

मैं हाव-हू पे कहानी को ख़त्म कर दूँगा

राना आमिर लियाक़त

अब ऐसे दश्त-मिज़ाजों से दूर घर लिया जाए

राना आमिर लियाक़त

वो जो भी बख़्शें वो इनआम ले लिया जाए

रम्ज़ आफ़ाक़ी

ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझ से बद-गुमाँ रहे

रमेश कँवल

ग़म छुपाने में वक़्त लगता है

रमेश कँवल

लहकती लहरों में जाँ है किनारे ज़िंदा हैं

राम रियाज़

रक़्स-ए-शबाब-ओ-रंग-ए-बहाराँ नज़र में है

राम कृष्ण मुज़्तर

मजबूर तो बहुत हैं मोहब्बत में जी से हम

राम कृष्ण मुज़्तर

क्या ग़ज़ब है कि मुलाक़ात का इम्काँ भी नहीं

राम कृष्ण मुज़्तर

ये ज़िंदगी तो मुसलसल सवाल करती है

रख़शां हाशमी

दिल की धड़कन उलझ रही है ये कैसी सौग़ात ग़ज़ल की

रख़शां हाशमी

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