बज़्म Poetry (page 31)

उन का जश्न-ए-साल-गिरह

असरार-उल-हक़ मजाज़

शौक़-ए-गुरेज़ाँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-दिल

असरार-उल-हक़ मजाज़

नज़्र-ए-अलीगढ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

मुझे जाना है इक दिन

असरार-उल-हक़ मजाज़

किस से मोहब्बत है

असरार-उल-हक़ मजाज़

गुरेज़

असरार-उल-हक़ मजाज़

एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल्ली से वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

आज भी

असरार-उल-हक़ मजाज़

शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया

असरार-उल-हक़ मजाज़

जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है

असरार-उल-हक़ मजाज़

सुनता रहा है और सुनेगा जहाँ मुझे

असरारुल हक़ असरार

शैतान का फ़रमान

असरार जामई

मैं तिरे शहर में फिरती रही मारी मारी

असरा रिज़वी

बे-सबब ख़ौफ़ से दिल मेरा लरज़ता क्यूँ है

असरा रिज़वी

बालीदगी-ए-ज़र्फ़ पे दिखलाए गए लोग

असरा रिज़वी

ऐसा ये दर्द है कि भुलाया न जाएगा

असरा रिज़वी

आग जो दिल में लगी है वो बुझा दी जाए

असरा रिज़वी

क़रीब आ के भी इक शख़्स हो सका न मिरा

असलम कोलसरी

हमारी याद उन्हें आ गई तो क्या होगा

असलम आज़ाद

हम को पहचान कि ऐ बज़म-ए-चमन-ज़ार-ए-वजूद

असलम अंसारी

कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता

असलम अंसारी

कहाँ तलाश में जाऊँ कि जुस्तुजू तू है

आसिम वास्ती

ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन

आसिफ़ रज़ा

जतन तो ख़ूब किए उस ने टालने के मगर

आसिफ़ रज़ा

ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन

आसिफ़ रज़ा

सफ़ीना ग़र्क़ हुआ मेरा यूँ ख़मोशी से

आसिफ़ रज़ा

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