चंद्रमा Poetry (page 38)

किया गर्दिशों के हवाले उसे चाक पर रख दिया

असलम महमूद

शाम का रक़्स

असलम इमादी

अपनी आँखें जो बंद कर देखूँ

आसिमा ताहिर

मौजूद जो नहीं वही देखा बना हुआ

आसिम वास्ती

क्या फ़ाश करूँ ग़म-ए-निहाँ को

आसिफ़ुद्दौला

कार-ए-दुनिया से गए दीदा-ए-बेदार के साथ

अासिफ़ शफ़ी

हरगिज़ मिरा वहशी न हुआ राम किसी का

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

हैफ़ दिल में तिरे वफ़ा न हुई

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई का

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

देखिए ख़ाक में मजनूँ की असर है कि नहीं

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

अबस अबस तुझे मुझ से हिजाब आता है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

यतीम इंसाफ़

अशोक लाल

सुनो कुछ दीदा-ए-नम बोलते हैं

असग़र वेलोरी

उस जल्वा-गाह-ए-हुस्न में छाया है हर तरफ़

असग़र गोंडवी

लोग मरते भी हैं जीते भी हैं बेताब भी हैं

असग़र गोंडवी

अल्लाह-रे चश्म-ए-यार की मोजिज़-बयानियाँ

असग़र गोंडवी

ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ

असग़र गोंडवी

मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना

असग़र गोंडवी

जो नक़्श है हस्ती का धोका नज़र आता है

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

किस तरह आए तिरी बज़्म-ए-तरब में आइना

असीर लखनवी

जिस हुस्न की है चश्म-ए-तमन्ना को जुस्तुजू

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं

असर लखनवी

अज़ल के दिन जिन्हें देखा था बज़्म-ए-हुस्न-ए-पिन्हाँ में

आरज़ू सहारनपुरी

वो बन कर बे-ज़बाँ लेने को बैठे हैं ज़बाँ मुझ से

आरज़ू लखनवी

नज़र उस चश्म पे है जाम लिए बैठा हूँ

आरज़ू लखनवी

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