नदी Poetry (page 18)

बारिश थी और अब्र था दरिया था और बस

सीमा ग़ज़ल

क़तरे को तुम दरिया कर दो

सय्यद ज़िया अल्वी

बिस्तर-ए-हिज्र की शिकनों पे कहानी लिख दे

सय्यद ज़िया अल्वी

आँख के साहिल पर आते ही अश्क हमारे डूब गए

सय्यद ज़िया अल्वी

सोख़्ता कश्ती का मलबा मैं मिरा दिल और शाम

सय्यद नसीर शाह

जो भी तख़्त पे आ कर बैठा उस को यज़्दाँ मान लिया

सय्यद नसीर शाह

धरती में भी रेंग रही है ख़ून की इक शिरयान

सय्यद नसीर शाह

सियाह रात के दरिया को पार करते चलो

सौरभ शेखर

दिल में तिरे जो कोई घर कर गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बहार-ए-बाग़ हो मीना हो जाम-ए-सहबा हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल के दरिया ने किनारों से मोहब्बत कर ली

सरवत ज़ेहरा

वक़्त भी अब मिरा मरहम नहीं होने पाता

सरवत ज़ेहरा

फूल खिले हैं मौसम बदला सहरा के वीरानों का

सरवर नेपाली

आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक

सरवर आलम राज़

बे-कैफ़ जवानी है बे-दर्द ज़माना है

सरवर आलम राज़

एक पुल बनाया जा रहा है

सरवत हुसैन

ये जो फूट बहा है दरिया फिर नहीं होगा

सरवत हुसैन

गदा-ए-शहर-ए-आइंदा तही-कासा मिलेगा

सरवत हुसैन

अच्छा सा कोई सपना देखो और मुझे देखो

सरवत हुसैन

आते जाते मौसमों का सिलसिला बाक़ी रहे

सरवर उस्मानी

नींद से जागी हुई आँखों को अंधा कर दिया

सरमद सहबाई

ये जो तालाब है दरिया था कभी

सरफ़राज़ ज़ाहिद

मिल-जुल कर ईमान ख़ुदा पर ला सकते हैं

सरफ़राज़ ज़ाहिद

लड़खड़ाता हूँ कभी ख़ुद ही सँभल जाता हूँ

सरफ़राज़ नवाज़

पानियों में खेल कुछ ऐसा भी होना चाहिए था

सरफ़राज़ ख़ालिद

सहरा कोई बस्ती कोई दरिया है कि तुम हो

सरफ़राज़ ख़ालिद

उन को देखा तो तबीअ'त में रवानी आई

सरदार सोज़

एक ही ज़िंदा बचा है ये निराला पागल

सरदार सलीम

कुछ बद-गुमानियाँ हैं कुछ बद-ज़बानियाँ हैं

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

लाख समझाया मगर ज़िद पे अड़ी है अब भी

सदार आसिफ़

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