नदी Poetry (page 19)

हो लेने दो बारिश हम भी रो लेंगे

सदार आसिफ़

एक नाज़ुक दिल के अंदर हश्र बरपा कर दिया

सरस्वती सरन कैफ़

शायद मिट्टी मुझे फिर पुकारे

सारा शगुफ़्ता

कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते

साक़िब लखनवी

प्यास बढ़ती जा रही है बहता दरिया देख कर

साक़ी फ़ारुक़ी

सोच में डूबा हुआ हूँ अक्स अपना देख कर

साक़ी फ़ारुक़ी

शहर का शहर हुआ जान का प्यासा कैसा

साक़ी फ़ारुक़ी

मैं फिर से हो जाऊँगा तन्हा इक दिन

साक़ी फ़ारुक़ी

सामने जब कोई भरपूर जवानी आए

साक़ी अमरोहवी

वो गुम हुए हैं मुसाफ़िर रह-ए-तमन्ना में

समद अंसारी

हम रूह-ए-काएनात हैं नक़्श-ए-असास हैं

समद अंसारी

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

समद अंसारी

कभी मिली है जो फ़ुर्सत तो ये हिसाब किया

सलीम शुजाअ अंसारी

धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था

सलीम शुजाअ अंसारी

न छीन ले कहीं तन्हाई डर सा रहता है

सालिम सलीम

कुछ तो ठहरे हुए दरिया में रवानी करें हम

सालिम सलीम

ख़ुद अपनी ख़्वाहिशें ख़ाक-ए-बदन में बोने को

सालिम सलीम

वुसअ'त-ए-दामान-ए-दिल को ग़म तुम्हारा मिल गया

सालिक लखनवी

रेत पर मुझ को गुमाँ पानी का था

सलीम शहज़ाद

फिर न आएगा ये लम्हा सोच ले

सलीम शहज़ाद

नहीं है कोई दूसरा मंज़र चारों ओर

सलीम शहज़ाद

किसी रुत में जब मुस्कुराता है तू

सलीम शहज़ाद

ज़मीं को सज्दा किया ख़ूँ से बा-वज़ू हो कर

सलीम शाहिद

वो ख़ूँ बहा कि शहर का सदक़ा उतर गया

सलीम शाहिद

उस को मिल कर देख शायद वो तिरा आईना हो

सलीम शाहिद

सूरज ज़मीं की कोख से बाहर भी आएगा

सलीम शाहिद

सब थकन आँख में सिमट जाए

सलीम शाहिद

रास्ता चाहिए दरिया की फ़रावानी को

सलीम शाहिद

फिर कोई महशर उठाने मेरी तन्हाई में आ

सलीम शाहिद

इन दर-ओ-दीवार की आँखों से पट्टी खोल कर

सलीम शाहिद

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.