दीवार Poetry (page 8)

असर है ये हमारी दस्तकों का

विकास शर्मा राज़

कोई उस के बराबर हो गया है

विकास शर्मा राज़

हवा के वार पे अब वार करने वाला है

विकास शर्मा राज़

हवा के साथ यारी हो गई है

विकास शर्मा राज़

जुदाई

वर्षा गोरछिया

हवा-ए-शोख़ की आख़िर फ़ुसूँ कारी ये कैसी है

वली मदनी

बना कर ख़ुद को जिस ने इक भला इंसान रक्खा है

वली मदनी

बहुत टूटा हूँ लेकिन हौसला ज़िंदा बहुत कुछ है

वली मदनी

आसमाँ से सहीफ़े उतरते रहे

उषा भदोरिया

तअ'स्सुब की फ़ज़ा में ता'ना-ए-किरदार क्या देता

उनवान चिश्ती

ज़हर में बुझती हुई बेल है दीवार के साथ

उम्मीद ख़्वाजा

वो ख़्वाब ही सही पेश-ए-नज़र तो अब भी है

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

हम तिरा अहद-ए-मोहब्बत ठहरे

उम्मीद फ़ाज़ली

हाए इक शख़्स जिसे हम ने भुलाया भी नहीं

उम्मीद फ़ाज़ली

इक ऐसा मरहला-ए-रह-गुज़र भी आता है

उम्मीद फ़ाज़ली

आईना-ए-वहशत को जिला जिस से मिली है

उम्मीद फ़ाज़ली

हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या

उमर अंसारी

कभी इक़रार होना था कभी इंकार होना था

उमैर मंज़र

फूल होंटों को ग़ज़ल-ख़्वाँ देखना

तुफ़ैल बिस्मिल

नूर-जहाँ का मज़ार

तिलोकचंद महरूम

मेरी सूरत साया-ए-दीवार-ओ-दर में कौन है

तौसीफ़ तबस्सुम

मेरी सूरत साया-ए-दीवार-ओ-दर में कौन है

तौसीफ़ तबस्सुम

मरते मरते रौशनी का ख़्वाब तो पूरा हुआ

तौसीफ़ तबस्सुम

क्या बताऊँ कि है किस ज़ुल्फ़ का सौदा मुझ को

तौसीफ़ तबस्सुम

अजीब रंग थे दिल में जो आँसुओं में न थे

तौसीफ़ तबस्सुम

कल जहाँ दीवार ही दीवार थी

तौक़ीर तक़ी

दर्द जब से दिल-नशीं है इश्क़ है

तौक़ीर तक़ी

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

मीर तस्कीन देहलवी

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