दीवार Poetry (page 10)

ख़ामोश भी रह जाए और इज़हार भी कर दे

तफ़ज़ील अहमद

कब खुलेगा कि फ़लक पार से आगे क्या है

ताबिश कमाल

कब खुलेगा कि फ़लक पार से आगे क्या है

ताबिश कमाल

अजीब सुब्ह थी दीवार ओ दर कुछ और से थे

ताबिश कमाल

'ताबिश' हवस-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार कहाँ तक

ताबिश देहलवी

शर्मिंदा हम जुनूँ से हैं एक एक तार के

ताबिश देहलवी

एक जल्वा ब-सद अंदाज़-ए-नज़र देख लिया

ताबिश देहलवी

बंद-ए-ग़म मुश्किल से मुश्किल-तर खुला

ताबिश देहलवी

ज़वाल की आख़िरी चीख़

तबस्सुम काश्मीरी

हर सितम लुत्फ़ है दिल ख़ूगर-ए-आज़ार कहाँ

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

एक तुम ही नहीं दुनिया में जफ़ाकार बहुत

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

आइने को तिरी सूरत से न हो क्यूँ कर हैरत

ताबाँ अब्दुल हई

क़फ़स से छूटने की कब हवस है

ताबाँ अब्दुल हई

खोता ही नहीं है हवस-ए-मतअम-ओ-मलबस

ताबाँ अब्दुल हई

हो रूह के तईं जिस्म से किस तरह मोहब्बत

ताबाँ अब्दुल हई

ग़ैर के हाथ में उस शोख़ का दामान है आज

ताबाँ अब्दुल हई

महफ़िल से उठाने के सज़ा-वार हमीं थे

तअशशुक़ लखनवी

क्या देखता है हाल के मंज़र इधर भी देख

सय्यदा शान-ए-मेराज

मैं ने कहा कि दा'वा-ए-उलफ़त मगर ग़लत

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

रिवाज-ओ-रस्म का उस को हुनर भी आता है

सय्यद मुनीर

सिगरेट और पान का मुकालिमा

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

अब और तब

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

ज़िंदगी क्या हर क़दम पर इक नई दीवार है

सय्यद मेराज जामी

ख़ैर की नज़्र की है या शर की

सय्यद काशिफ़ रज़ा

क्यूँ सादगी से उस की तकरार हो गई है

सय्यद हामिद

अजब नहीं कि हो दीवार नुक़्ता-ए-मौहूम

सय्यद अमीन अशरफ़

ये आँख तंज़ न हो ज़ख़्म-ए-दिल हरा न लगे

सय्यद अमीन अशरफ़

न जाने रौज़न-ए-दीवार क्या जादू जगाता है

सय्यद अमीन अशरफ़

किसी ख़याल की रौ में था मुस्कुराते हुए

सय्यद अमीन अशरफ़

फ़साद-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र हासिल-ए-तमाशा देख

सय्यद अमीन अशरफ़

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