दिल Poetry (page 28)

रौशनी का क़ालिब जब तीरगी में ढलता है

यहया ख़ालिद

ख़ुदा गवाह

यहया अमजद

बाग़ों में आएगी कब बहार

यहया अमजद

शर्बत का घूँट जान के पीता हूँ ख़ून-ए-दिल

यगाना चंगेज़ी

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शर्माना नहीं आता

यगाना चंगेज़ी

ख़ुदा ही जाने 'यगाना' मैं कौन हूँ क्या हूँ

यगाना चंगेज़ी

गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ

यगाना चंगेज़ी

दैर ओ हरम भी ढह गए जब दिल नहीं रहा

यगाना चंगेज़ी

ज़माना ख़ुदा को ख़ुदा जानता है

यगाना चंगेज़ी

यार है आइना है शाना है

यगाना चंगेज़ी

वाँ नक़ाब उट्ठी कि सुब्ह-ए-हश्र का मंज़र खुला

यगाना चंगेज़ी

वहशत थी हम थे साया-ए-दीवार-ए-यार था

यगाना चंगेज़ी

उदासी छा गई चेहरे पे शम-ए-महफ़िल के

यगाना चंगेज़ी

साया अगर नसीब हो दीवार-ए-यार का

यगाना चंगेज़ी

सलामत रहें दिल में घर करने वाले

यगाना चंगेज़ी

रौशन तमाम काबा ओ बुत-ख़ाना हो गया

यगाना चंगेज़ी

क़िस्सा किताब-ए-उम्र का क्या मुख़्तसर हुआ

यगाना चंगेज़ी

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता

यगाना चंगेज़ी

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

यगाना चंगेज़ी

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया

यगाना चंगेज़ी

ख़ुदा की मार वो अय्याम-ए-शोर-ओ-शर गुज़रे

यगाना चंगेज़ी

कारगाह-ए-दुनिया की नेस्ती भी हस्ती है

यगाना चंगेज़ी

दामन-ए-क़ातिल जो उड़ उड़ कर हवा देने लगे

यगाना चंगेज़ी

चलता नहीं फ़रेब किसी उज़्र-ख़्वाह का

यगाना चंगेज़ी

चले चलो जहाँ ले जाए वलवला दिल का

यगाना चंगेज़ी

अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता

यगाना चंगेज़ी

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

यगाना चंगेज़ी

आप से आप अयाँ शाहिद-ए-मअ'नी होगा

यगाना चंगेज़ी

आप में क्यूँकर रहे कोई ये सामाँ देख कर

यगाना चंगेज़ी

आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे

यगाना चंगेज़ी

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