दिल Poetry (page 304)

दम-ए-तकल्लुम किसी के आगे हम अपने दिल को भी देते हौके

अज़ीज़ हैदराबादी

बहुत कुछ देखना है आगे आगे

अज़ीज़ हैदराबादी

आँखों में तिरी शक्ल है दिल में है तिरी याद

अज़ीज़ हैदराबादी

ज़ालिम तिरे वादों ने दीवाना बना रक्खा

अज़ीज़ हैदराबादी

वहशत-ए-दिल का अजब रंग नज़र आता है

अज़ीज़ हैदराबादी

उठाईं हिज्र की शब दिल ने आफ़तें क्या क्या

अज़ीज़ हैदराबादी

शोख़ी उफ़-रे तिरी नज़र की

अज़ीज़ हैदराबादी

शोख़ी से कश्मकश नहीं अच्छी हिजाब की

अज़ीज़ हैदराबादी

न बदलना था न बदला दिल-ए-शैदा अपना

अज़ीज़ हैदराबादी

मोहब्बत का मुझे दावा ही क्या है

अज़ीज़ हैदराबादी

तिलिस्म-ए-शेवा-ए-याराँ खुला तो कुछ न हुआ

अज़ीज़ हामिद मदनी

सुब्ह से चलते चलते आख़िर शाम हुई आवारा-ए-दिल

अज़ीज़ हामिद मदनी

मिरा चाक-ए-गिरेबाँ चाक-ए-दिल से मिलने वाला है

अज़ीज़ हामिद मदनी

ख़ूँ हुआ दिल कि पशीमान-ए-सदाक़त है वफ़ा

अज़ीज़ हामिद मदनी

खुला ये दिल पे कि तामीर-ए-बाम-ओ-दर है फ़रेब

अज़ीज़ हामिद मदनी

जो बात दिल में थी उस से नहीं कही हम ने

अज़ीज़ हामिद मदनी

अलग सियासत-ए-दरबाँ से दिल में है इक बात

अज़ीज़ हामिद मदनी

ज़ंजीर-ए-पा से आहन-ए-शमशीर है तलब

अज़ीज़ हामिद मदनी

ये फ़ज़ा-ए-साज़-ओ-मुज़रिब ये हुजूम-ताज-ए-दाराँ

अज़ीज़ हामिद मदनी

वो एक रौ जो लब-ए-नुक्ता-चीं में होती है

अज़ीज़ हामिद मदनी

ताज़ा हवा बहार की दिल का मलाल ले गई

अज़ीज़ हामिद मदनी

सँभल न पाए तो तक़्सीर-ए-वाक़ई भी नहीं

अज़ीज़ हामिद मदनी

सलीब ओ दार के क़िस्से रक़म होते ही रहते हैं

अज़ीज़ हामिद मदनी

निसार यूँ तो हुआ तुझ पे नक़्द-ए-जाँ क्या क्या

अज़ीज़ हामिद मदनी

नावक-ए-ताज़ा दिल पर मारा जंग पुरानी जारी की

अज़ीज़ हामिद मदनी

नरमी हवा की मौज-ए-तरब-ख़ेज़ अभी से है

अज़ीज़ हामिद मदनी

नक़्शे उसी के दिल में हैं अब तक खिंचे हुए

अज़ीज़ हामिद मदनी

न फ़ासले कोई निकले न क़ुर्बतें निकलीं

अज़ीज़ हामिद मदनी

मिरी आँखें गवाह-ए-तल'अत-ए-आतिश हुईं जल कर

अज़ीज़ हामिद मदनी

लिखी हुई जो तबाही है उस से क्या जाता

अज़ीज़ हामिद मदनी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.