दिल Poetry (page 341)

थी सियाहियों का मस्कन मिरी ज़िंदगी की वादी

आमिर उस्मानी

लौटे कुछ इस तरह तिरी जल्वा-सरा से हम

आमिर उस्मानी

इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है

आमिर उस्मानी

हक़ीर ख़ाक के ज़र्रे थे आसमान हुए

आमिर उस्मानी

ग़म-ए-बेहद में किस को ज़ब्त का मक़्दूर होता है

आमिर उस्मानी

मुझ को ख़ामोशी-ए-हालात से डर लगता है

आमिर रियाज़

मैं ने तूफ़ान से पहले का इशारा देखा

आमिर रियाज़

एक इक तार-ए-नफ़स आशुफ़्ता-ए-आहंग था

आमिर नज़र

ए'तिबार-ए-शौक़ इक धोका सही

आमिर मौसवी

तेरी इनायतों का अजब रंग ढंग था

अमीर हम्ज़ा साक़िब

न तो बे-करानी-ए-दिल रही न तो मद्द-ओ-जज़्र-ए-तलब रहा

अमीर हम्ज़ा साक़िब

ग़ज़लों से तज्सीम हुई तकमील हुई

अमीर हम्ज़ा साक़िब

दश्त-ए-बला-ए-शौक़ में ख़ेमे लगाए हैं

अमीर हम्ज़ा साक़िब

ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन

अमीता परसुराम 'मीता'

रक़ीब-ए-जाँ नज़र का नूर हो जाए तो क्या कीजे

अमीता परसुराम 'मीता'

कम्बख़्त दिल ने इश्क़ को वहशत बना दिया

अमीता परसुराम 'मीता'

बन गए दिल के फ़साने क्या क्या

अमीता परसुराम 'मीता'

किया करते हैं दिलदारी दिल-आज़ारी नहीं करते

अमीरुल इस्लाम हाशमी

सुब्ह तक मैं सोचता हूँ शाम से

अमीर क़ज़लबाश

ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है

अमीर क़ज़लबाश

जाने ये किस की बनाई हुई तस्वीरें हैं

अमीर क़ज़लबाश

इक परिंदा अभी उड़ान में है

अमीर क़ज़लबाश

बंद आँखों से वो मंज़र देखूँ

अमीर क़ज़लबाश

आँखें खुली हुई हैं तो मंज़र भी आएगा

अमीर क़ज़लबाश

ये कहूँगा ये कहूँगा ये अभी कहते हो

अमीर मीनाई

यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

अमीर मीनाई

तरफ़-ए-काबा न जा हज के लिए नादाँ है

अमीर मीनाई

समझता हूँ सबब काफ़िर तिरे आँसू निकलने का

अमीर मीनाई

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