दिल Poetry (page 342)

पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाश

अमीर मीनाई

नावक-ए-नाज़ से मुश्किल है बचाना दिल का

अमीर मीनाई

किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं 'अमीर'

अमीर मीनाई

ख़ुशामद ऐ दिल-ए-बेताब इस तस्वीर की कब तक

अमीर मीनाई

इन शोख़ हसीनों पे जो माइल नहीं होता

अमीर मीनाई

हो गया बंद दर-ए-मै-कदा क्या क़हर हुआ

अमीर मीनाई

बाक़ी न दिल में कोई भी या रब हवस रहे

अमीर मीनाई

या-रब शब-ए-विसाल ये कैसा गजर बजा

अमीर मीनाई

वस्ल की शब भी ख़फ़ा वो बुत-ए-मग़रूर रहा

अमीर मीनाई

वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है

अमीर मीनाई

पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया

अमीर मीनाई

फूलों में अगर है बू तुम्हारी

अमीर मीनाई

पहले तो मुझे कहा निकालो

अमीर मीनाई

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

मुझ मस्त को मय की बू बहुत है

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे

अमीर मीनाई

क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हुआ जो पैवंद मैं ज़मीं का तो दिल हुआ शाद मुझ हज़ीं का

अमीर मीनाई

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

हम-सर-ए-ज़ुल्फ़ क़द-ए-हूर-ए-शमाइल ठहरा

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

गले में हाथ थे शब उस परी से राहें थीं

अमीर मीनाई

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