दिल Poetry (page 340)

आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है

अमजद इस्लाम अमजद

ये लगता है अब भी कहीं कुछ बचा है

अमित शर्मा मीत

नज़र भर के यूँ जो मुझे देखता है

अमित शर्मा मीत

मैं केवल अब ख़ुद से रिश्ता रक्खूँगा

अमित शर्मा मीत

जब जज़्बा इक बार जिगर में आता है

अमित शर्मा मीत

ग़रज़ पड़ने पे उस से माँगता है

अमित शर्मा मीत

दुनिया को जब नज़दीकी से देखा है

अमित शर्मा मीत

अपनी आँखों को कभी ठीक से धोया ही नहीं

अमित शर्मा मीत

अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को

अमित शर्मा मीत

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

तड़पती देखता हूँ जब कोई शय

अमीरुल्लाह तस्लीम

नासेह ख़ता मुआफ़ सुनें क्या बहार में

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़ाली सही बला से तसल्ली तो दिल को हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

हम ने पाला मुद्दतों पहलू में हम कोई नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है

अमीरुल्लाह तस्लीम

दास्तान-ए-शौक़-ए-दिल ऐसी नहीं थी मुख़्तसर

अमीरुल्लाह तस्लीम

क्यूँ ख़राबात में लाफ़-ए-हमा-दानी वाइ'ज़

अमीरुल्लाह तस्लीम

कल मिरा था आज वो बुत ग़ैर का होने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

कहने सुनने से मिरी उन की अदावत हो गई

अमीरुल्लाह तस्लीम

ग़ैब से सहरा-नवरदों का मुदावा हो गया

अमीरुल्लाह तस्लीम

गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

इक आफ़त-ए-जाँ है जो मुदावा मिरे दिल का

अमीरुल्लाह तस्लीम

चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी

अमीरुल्लाह तस्लीम

इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है

आमिर उस्मानी

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

इल्तिजा

आमिर उस्मानी

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