दिल Poetry (page 90)

तर्क-ए-मोहब्बत पर भी होगी उन को नदामत हम से ज़ियादा

शमीम जयपुरी

सफ़ीना वो कभी शायान-ए-साहिल हो नहीं सकता

शमीम जयपुरी

न पूछ कब से ये दम घुट रहा है सीने में

शमीम जयपुरी

जब सुब्ह का मंज़र होता है या चाँदनी-रातें होती हैं

शमीम जयपुरी

इस इल्तिफ़ात पर कोई दामन न थाम ले

शमीम जयपुरी

हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ

शमीम जयपुरी

गो तही-दामन हूँ लेकिन ग़म नहीं

शमीम जयपुरी

गले लगा के जो सुनते थे दिल की आहों को

शमीम जयपुरी

दुनिया-ए-मोहब्बत में हम से हर अपना पराया छूट गया

शमीम जयपुरी

बे-गुनाही का हर एहसास मिटा दे कोई

शमीम जयपुरी

आज जीने की कुछ उम्मीद नज़र आई है

शमीम जयपुरी

चाहा बयाँ करूँ जों है मेरे ख़याल में

शमीम हाश्मी

ये रिश्ता-ए-जाँ मेरी तबाही का सबब है

शमीम हनफ़ी

शाम आई सेहन-ए-जाँ में ख़ौफ़ का बिस्तर लगा

शमीम हनफ़ी

रोज़ ओ शब की गुत्थियाँ आँखों को सुलझाने न दे

शमीम हनफ़ी

परछाइयों की बात न कर रंग-ए-हाल देख

शमीम हनफ़ी

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

क्यूँ परेशान हुआ जाता है दिल क्या जाने

शमीम हनफ़ी

ऐसे कई सवाल हैं जिन का जवाब कुछ नहीं

शमीम हनफ़ी

कौन सा शो'ला लपकता है ये महमिल के क़रीब

शमीम फ़तेहपुरी

शर्मीली छूई-मूई अजब मोहनी सी थी

शमीम फ़ारूक़ी

डूबते सूरज का मंज़र वो सुहानी कश्तियाँ

शमीम फ़ारूक़ी

ये किस का जल्वा-ए-हैरत-फ़ज़ा निगाह में है

शकूर जावेद

हर नफ़स दीदा-ए-दिल में तिरी यादों का हुजूम

शकूर जावेद

याद-ए-वतन

शाकिर मेरठी

कब शौक़ मिरा जज़्बे से बाहर न हुआ था

शाकिर ख़लीक़

हम जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाए हुए हैं

शाकिर ख़लीक़

भुगत रहा हूँ ख़ुद अपने किए का ख़म्याज़ा

शाकिर ख़लीक़

तेरे नालों से कोई बदनाम होता जाएगा

शाकिर कलकत्तवी

बे-पर्दा उस का चेहरा-ए-पुर-नूर तो हुआ

शाकिर कलकत्तवी

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