दिन Poetry (page 73)

रात से दिन का वो जो रिश्ता थी

दिनेश नायडू

इक हरे ख़त में कोई बात पुरानी पढ़ना

दिनेश नायडू

मर्दुम-गज़ीदा इंसान का इलाज

दिलावर फ़िगार

लग गए हैं फ़ोन लगने में जो पच्चीस साल

दिलावर फ़िगार

कराची का क़ब्रिस्तान

दिलावर फ़िगार

इश्क़ का परचा

दिलावर फ़िगार

सियाह ज़ुल्फ़ को जो बन-सँवर के देखते हैं

दिलावर फ़िगार

न मिरा मकाँ ही बदल गया न तिरा पता कोई और है

दिलावर फ़िगार

इक दिन जो यूँही पर्दा-ए-अफ़्लाक उठाया

दिलावर अली आज़र

ज़मीन अपने ही मेहवर से हट रही होगी

दिलावर अली आज़र

वो बहते दरिया की बे-करानी से डर रहा था

दिलावर अली आज़र

मंज़र से उधर ख़्वाब की पस्पाई से आगे

दिलावर अली आज़र

लम्हा लम्हा वुसअत-ए-कौन-ओ-मकाँ की सैर की

दिलावर अली आज़र

ख़ुद में खिलते हुए मंज़र से नुमूदार हुआ

दिलावर अली आज़र

खींच कर अक्स फ़साने से अलग हो जाओ

दिलावर अली आज़र

बोझ उठाए हुए दिन रात कहाँ तक जाता

दिलावर अली आज़र

आग लग जाएगी इक दिन मिरी सरशारी को

दिलावर अली आज़र

तेरा क्या जाता जो मिलता जाम-ए-रेहानी मुझे

धनपत राय थापर राज़

क्या चाहा था क्या सोचा था क्या गुज़री क्या बात हुई

देवमणि पांडेय

इक क़तरे को दरिया समझा मैं भी कैसा पागल हूँ

देवमणि पांडेय

सुनहरी मछली

दीप्ति मिश्रा

मैं ने अपना हक़ माँगा था वो नाहक़ ही रूठ गया

दीप्ति मिश्रा

ग़म को वज्ह-ए-हयात कहते हैं

द्वारका दास शोला

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद

द्वारका दास शोला

रूह-ए-आवारा

दाऊद ग़ाज़ी

अगर वो गुल-बदन मुझ पास हो जावे तो क्या होवे

दाऊद औरंगाबादी

दैर ओ काबा में भटकते फिर रहे हैं रात दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

ज़िंदगी का किस लिए मातम रहे

दत्तात्रिया कैफ़ी

क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है

दत्तात्रिया कैफ़ी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.