दिन Poetry (page 75)

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

बुतान-ए-माहवश उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं

दाग़ देहलवी

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

दाग़ देहलवी

नज़्म

चाैधरी मोहम्मद नईम

तन्हाई में आज उन से मुलाक़ात हुई है

चरख़ चिन्योटी

मचलेंगे उन के आने पे जज़्बात सैंकड़ों

चरख़ चिन्योटी

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है

चरख़ चिन्योटी

तय हुआ दिन कि खुले शाम के बिस्तर चलिए

चराग़ बरेलवी

क़तरा क़तरा एहसास

चन्द्रभान ख़याल

गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार

चन्द्रभान ख़याल

उम्र के लम्बे सफ़र से तजरबा ऐसा मिला

चाँदनी पांडे

नई-देहली

चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

हल्की हल्की बूँदें बरसीं पंछी करें कलोल

चमन लाल चमन

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

अभी बादलों का सफ़र कहाँ मिरे मेहरबाँ

बुशरा हाश्मी

मैं जब ख़ुद से बिछड़ती हूँ

बुशरा एजाज़

ख़ुशियाँ थीं बेवफ़ा न रहीं ज़िंदगी के साथ

बबल्स होरा सबा

आसमाँ है समुंदर पे छाया हुआ

बृजेश अम्बर

इस क़दर बढ़ गई वहशत तिरे दीवाने की

बूम मेरठी

अल्लाह अल्लाह वस्ल की शब इस क़दर ए'जाज़ है

बूम मेरठी

दो दिन में हो गया है ये आलम कि जिस तरह

बिस्मिल सईदी

रह-रव-ए-राह-ए-मोहब्बत कौन सी मंज़िल में है

बिस्मिल सईदी

जब आया ईद का दिन घर में बेबसी की तरह

बिस्मिल साबरी

सहर हुई तो ख़यालों ने मुझ को घेर लिया

बिस्मिल साबरी

हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और

बिस्मिल साबरी

हो न मायूस ख़ुदा से 'बिस्मिल'

बिस्मिल अज़ीमाबादी

एक दिन वो दिन थे रोने पे हँसा करते थे हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

रुख़ पे गेसू जो बिखर जाएँगे

बिस्मिल अज़ीमाबादी

जब कभी नाम-ए-मोहम्मद लब पे मेरे आए है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

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