छल Poetry (page 15)

ग़म-ए-हयात में कोई कमी नहीं आई

अहमद राही

फ़रेब खाने को पेशा बना लिया हम ने

अहमद नदीम क़ासमी

पस-ए-आईना

अहमद नदीम क़ासमी

फिर भयानक तीरगी में आ गए

अहमद नदीम क़ासमी

लबों पे नर्म तबस्सुम रचा के धुल जाएँ

अहमद नदीम क़ासमी

जी चाहता है फ़लक पे जाऊँ

अहमद नदीम क़ासमी

फ़ासले के मअ'नी का क्यूँ फ़रेब खाते हो

अहमद नदीम क़ासमी

बारिश की रुत थी रात थी पहलू-ए-यार था

अहमद नदीम क़ासमी

अजब नहीं कभी नग़्मा बने फ़ुग़ाँ मेरी

अहमद मुश्ताक़

अब न बहल सकेगा दिल अब न दिए जलाइए

अहमद मुश्ताक़

अब न बहल सकेगा दिल अब न दिए जलाइए

अहमद मुश्ताक़

सुब्ह-ए-फ़िराक़ अल-अमाँ वस्ल की शाम अल-अमाँ

अहमद हमेश

ज़ेर-ए-लब

अहमद फ़राज़

किसे ख़बर कि है क्या क्या ये जान थामे हुए

अहमद अज़ीम

अब सोचिए तो दाम-ए-तमन्ना में आ गए

अहमद अज़ीम

कर के असीर-ए-ग़म्ज़ा-ओ-नाज़-ओ-अदा मुझे

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

इब्न-ए-आदम बरसर पैकार है

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

हिंसा के पहले मुझे फिर रुला गया इक शख़्स

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से

आग़ा हश्र काश्मीरी

तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ

आग़ा हज्जू शरफ़

गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

अफ़ज़ल अलवी

पंजों के बल खड़े हुए शब की चटान पर

आफ़ताब इक़बाल शमीम

जब चाहा ख़ुद को शाद या नाशाद कर लिया

आफ़ताब इक़बाल शमीम

ज़बाँ को हुक्म निगाह-ए-करम को पहचाने

अदा जाफ़री

मिज़ाज-ओ-मर्तबा-ए-चश्म-ए-नम को पहचाने

अदा जाफ़री

बेगानगी-ए-तर्ज़-ए-सितम भी बहाना-साज़

अदा जाफ़री

हर एहतिमाम है दो दिन की ज़िंदगी के लिए

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

सब की आँखों में जो समाया था

अबु मोहम्मद सहर

बुत यहाँ मिलते नहीं हैं या ख़ुदा मिलता नहीं

अब्दुल्लतीफ़ शौक़

मेरी आँखों में आँसू प्यारे

अब्दुल मन्नान तरज़ी

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