शोक Poetry (page 118)

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

अतीक़ अंज़र

जिस की ख़ातिर मैं ने दुनिया की तरफ़ देखा न था

अतीक़ अंज़र

गुज़िश्ता रात कोई चाँद घर में उतरा था

अतीक़ अंज़र

अश्क इन आँखों से हम दिल में बहा कर देखें

अतीक़ अंज़र

नवाज़ता था हमेशा वो ग़म की दौलत से

अतीक़ इलाहाबादी

जुदाई हद से बढ़ी तो विसाल हो ही गया

अतीक़ इलाहाबादी

मैं अपनी ख़ाक को जब आइना बनाता हूँ

अतीक़ अहमद

गुमाँ के तन पे यक़ीं का लिबास रहने दो

अतीब एजाज़

किसे दिमाग़ कि उलझे तिलिस्म-ए-ज़ात के साथ

अताउर्रहमान क़ाज़ी

तिरी आँखों में इक मुबहम फ़साना ढूँढ ही लेगा

अताउर्रहमान जमील

शोहरत-ए-फ़न बहुत हुई दाद कमाल दे गए

अताउर्रहमान जमील

आँसू तुम्हारी आँख में आए तो उठ गए

अताउर्रहमान जमील

दम-ब-दम एक साथ बैठे हैं

अताउल हसन

कब कहाँ क्या मिरे दिलदार उठा लाएँगे

अता तुराब

बड़ा कठिन है रास्ता जो आ सको तो साथ दो

अता शाद

सर पे सूरज हो मगर साया न हो ऐसा न था

अता आबिदी

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्यूँकर कहते

असरार-उल-हक़ मजाज़

मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो

असरार-उल-हक़ मजाज़

तिफ़्ली के ख़्वाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

सानेहा

असरार-उल-हक़ मजाज़

नौ-जवान से

असरार-उल-हक़ मजाज़

मज़दूरों का गीत

असरार-उल-हक़ मजाज़

इशरत-ए-तन्हाई

असरार-उल-हक़ मजाज़

इंक़लाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न-ओ-इश्क़

असरार-उल-हक़ मजाज़

फ़िक्र

असरार-उल-हक़ मजाज़

ए'तिराफ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल्ली से वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

आवारा

असरार-उल-हक़ मजाज़

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