शोक Poetry (page 117)

इश्क़ से मैं डर चुका था डर चुका तो तुम मिले

औरंगज़ेब

हवस ने मुझ से पूछा था तुम्हारा क्या इरादा है

औरंगज़ेब

आम रस्ते से हट के आया हूँ

औरंगज़ेब

न पूछो कैसे शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

औलाद अली रिज़वी

अपने सूखे हुए गुल-दान का ग़म है मुझ को

अतीक़ुल्लाह

वो मेरे नाले का शोर ही था शब-ए-सियह की निहायतों में

अतीक़ुल्लाह

मुझ से बे-ज़ारो न यूँ संग से मारो मुझ को

अतीक़ुल्लाह

दिल के नज़दीक तो साया भी नहीं है कोई

अतीक़ुल्लाह

इश्क़ पागल-पन में संजीदा न हो जाए कहीं

आतिफ़ ख़ान

ग़म के बादल दिल-ए-नाशाद पे ऐसे छाए

अतहर राज़

यक़ीन बरसों का इम्कान कुछ दिनों का हूँ

अतहर नासिक

कभी कभार भी कब साएबाँ किसी ने दिया

अतहर नासिक

इक आग ग़म-ए-तन्हाई की जो सारे बदन में फैल गई

अतहर नफ़ीस

वो इश्क़ जो हम से रूठ गया अब उस का हाल बताएँ क्या

अतहर नफ़ीस

सुकूत-ए-शब से इक नग़्मा सुना है

अतहर नफ़ीस

रौनक़-ए-बेश-ओ-कम किस के होने से है

अतहर नफ़ीस

फिर कोई नया ज़ख़्म नया दर्द अता हो

अतहर नफ़ीस

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

दम-ब-दम बढ़ रही है ये कैसी सदा शहर वालो सुनो

अतहर नफ़ीस

करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या

अतहर नादिर

दिल तो बरसाता है हर रोज़ ही ग़म के सावन

अतहर अज़ीज़

कोई नहीं हमारा पुर्सान-ए-हाल अब के

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

मसर्रत और ग़म दोनों की कोई हद ज़रूरी है

अतीक़ असर

शिकायत है बहुत लेकिन गिला अच्छा नहीं लगता

अतीक़ असर

ग़म ये नहीं कि ग़म से मुलाक़ात हुई

अतीक़ असर

दूर मुझ से रहते हैं सारे ग़म ज़माने के

अतीक़ अंज़र

उदास बैठा दिए ज़ख़्म के जलाए हुए

अतीक़ अंज़र

सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए

अतीक़ अंज़र

मिरी ज़िंदगी किसी मोड़ पर कभी आँसुओं से वफ़ा न दे

अतीक़ अंज़र

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.