शोक Poetry (page 57)

वो जो मुझ से मिलता नहीं

सग़ीर अालम

एक नग़्मा इक तारा एक ग़ुंचा एक जाम

साग़र सिद्दीक़ी

ज़ख़्म-ए-दिल पर बहार देखा है

साग़र सिद्दीक़ी

तारों से मेरा जाम भरो मैं नशे में हूँ

साग़र सिद्दीक़ी

नज़र नज़र बे-क़रार सी है नफ़स नफ़स में शरार सा है

साग़र सिद्दीक़ी

मुस्कुराओ बहार के दिन हैं

साग़र सिद्दीक़ी

महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम तोड़ दिया

साग़र सिद्दीक़ी

मआल-ए-नग़्मा-ओ-मातम फ़रोख़्त होता है

साग़र सिद्दीक़ी

ख़ता-वार-ए-मुरव्वत हो न मरहून-ए-करम हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

हर मरहला-ए-शौक़ से लहरा के गुज़र जा

साग़र सिद्दीक़ी

एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं

साग़र सिद्दीक़ी

एक नग़्मा इक तारा एक ग़ुंचा एक जाम

साग़र सिद्दीक़ी

बात फूलों की सुना करते थे

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

सदियों की शब-ए-ग़म को सहर हम ने बनाया

साग़र निज़ामी

नदीम-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बड़ा सहारा है

साग़र निज़ामी

हम आँखों से भी अर्ज़-ए-तमन्ना नहीं करते

साग़र निज़ामी

हैरत से तक रहा है जहान-ए-वफ़ा मुझे

साग़र निज़ामी

दोस्तो दुर्द पिलाओ कि कड़ी रात कटे

साग़र निज़ामी

हज़ार हम-सफ़रों में सफ़र अकेला है

साग़र मेहदी

टेम्परेरी जॉब

साग़र ख़य्यामी

रोटी कपड़ा और मकान

साग़र ख़य्यामी

क्रिकेट मैच

साग़र ख़य्यामी

अलाउद्दीन का तरबूज़

साग़र ख़य्यामी

ये हादसा है बता दे कोई ज़माने को

साग़र ख़य्यामी

तौबा तौबा से नदामत की घड़ी आई है

साग़र ख़य्यामी

कहूँ तो क्या मैं कहूँ प्यारी प्यारी आँखों को

साग़र ख़य्यामी

जान जाने को है और रक़्स में परवाना है

साग़र ख़य्यामी

बैठे हैं ऐसे ज़ुल्फ़ में कलियाँ सँवार के

साग़र ख़य्यामी

वो आज भी क़रीब से कुछ कह के हट गए

साग़र आज़मी

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