शोक Poetry (page 59)

लाख तक़दीर पे रोए कोई रोने वाला

सदा अम्बालवी

यूँ लगे दर्द की इस दिल से शनासाई है

सचिन शालिनी

आँधी का कर ख़याल न तेवर हवा के देख

साबिर ज़ाहिद

नज़र आते नहीं हैं बहर में हम

साबिर ज़फ़र

वो धूप वो गलियाँ वही उलझन नज़र आए

साबिर वसीम

तुम्हारे आलम से मेरा आलम ज़रा अलग है

साबिर

ये दिल की दास्तान है कि दिल ग़ुलाम कर दिया

सबीहा सबा, पाकिस्तान

जो भी होगा वार देखा जाएगा

सबीहा सबा, पाकिस्तान

जब कभी हादसात ने मारा

सबीहा सबा, पाकिस्तान

इक तिरी याद से यादों के ख़ज़ाने निकले

सबीहा सबा, पाकिस्तान

बस अना को बहाल रखना है

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

किस को बताते किस से छुपाते सुराग़-ए-दिल

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

अगर अल्फ़ाज़ से ग़म का इज़ाला हो गया होता

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

आज गुज़रे हुए लम्हों को पुकारा जाए

सबा जायसी

आ जा अँधेरी रातें तन्हा बिता चुका हूँ

सबा अख़्तर

कमाल-ए-ज़ब्त में यूँ अश्क-ए-मुज़्तर टूट कर निकला

सबा अकबराबादी

ग़म-ए-दौराँ को बड़ी चीज़ समझ रक्खा था

सबा अकबराबादी

ऐसा भी कोई ग़म है जो तुम से नहीं पाया

सबा अकबराबादी

उस का वादा ता-क़यामत कम से कम

सबा अकबराबादी

उलझनों में कैसे इत्मीनान-ए-दिल पैदा करें

सबा अकबराबादी

तुम ने रस्म-ए-जफ़ा उठा दी है

सबा अकबराबादी

तुझ से दामन-कशाँ नहीं हूँ मैं

सबा अकबराबादी

पूरी मिरे जुनूँ की ज़रूरत न कर सके

सबा अकबराबादी

मंज़िल पे पहुँचने का मुझे शौक़ हुआ तेज़

सबा अकबराबादी

कसरत-ए-जल्वा को आईना-ए-वहदत समझो

सबा अकबराबादी

जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है

सबा अकबराबादी

हुजूम-ए-ग़म है क़ल्ब ग़म-ज़दा है

सबा अकबराबादी

ग़ालिबन मेरे अलावा कोई गुज़रा भी नहीं

सबा अकबराबादी

अश्क-बारी नहीं फ़ुर्क़त में शरर-बारी है

सबा अकबराबादी

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काँटों से भी ज़ीनत होती है

सबा अफ़ग़ानी

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