शोक Poetry (page 61)

जी उठे हश्र में फिर जी से गुज़रने वाले

रियाज़ ख़ैराबादी

जफ़ा में नाम निकालो न आसमाँ की तरह

रियाज़ ख़ैराबादी

इश्क़ में दिल-लगी सी रहती है

रियाज़ ख़ैराबादी

हंस के पैमाना दिया ज़ालिम ने तरसाने के बा'द

रियाज़ ख़ैराबादी

फ़रियाद-ए-जुनूँ और है बुलबुल की फ़ुग़ाँ और

रियाज़ ख़ैराबादी

दिल ढूँढती है निगह किसी की

रियाज़ ख़ैराबादी

दर खुला सुब्ह को पौ फटते ही मय-ख़ाने का

रियाज़ ख़ैराबादी

मेरे अफ़्कार ने जिस शय से जिला पाई है

रियासत अली ताज

वही तवील सी राहें सफ़र वही तन्हा

ऋषि पटियालवी

सर-ए-राह इक हादिसा हो गया

ऋषि पटियालवी

वक़ार-ए-शाह-ए-ज़विल-इक्तदार देख चुके

रिन्द लखनवी

तू आप को पोशीदा ओ इख़्फ़ा न समझना

रिन्द लखनवी

तौबा का पास रिंद-ए-मय-आशाम हो चुका

रिन्द लखनवी

हैं ये सारे जीते-जी के वास्ते

रिन्द लखनवी

गले लगाएँ बलाएँ लें तुम को प्यार करें

रिन्द लखनवी

छुप के घर ग़ैर के जाया न करो

रिन्द लखनवी

जब नशात-ए-अलम नहीं होता

रिफ़अत सुलतान

अगर क़दम तिरे मय-कश का लड़खड़ा जाए

रिफ़अत सुलतान

यूँही गर लुत्फ़ तुम लेते रहोगे ख़ूँ बहाने में

रिफ़अत सेठी

मोहब्बत में वफ़ा वालों को कब ईज़ा सताती है

रिफ़अत सेठी

होते हैं ख़त्म अब ये लम्हात ज़िंदगी के

रिफ़अत सेठी

ज़िंदगी तुझ से बिछड़ कर मैं जिया एक बरस

रिफ़अत सरोश

शहर-ए-शोर-ओ-शर तन्हा घर के बाम-ओ-दर तन्हा

रिफ़अत सरोश

दीबाचा-ए-किताब-ए-वफ़ा है तमाम उम्र

रिफ़अत सरोश

चाँद वीरान है सदियों से मिरे दिल की तरह

रिफ़अत सरोश

बुझा बुझा के जलाता है दिल का शो'ला कौन

रिफ़अत सरोश

चाहतों का जो शजर है दोस्तो

रिफ़अत अल हुसैनी

बदल सका न जुदाई के ग़म उठा कर भी

रियाज़ मजीद

चराग़-ए-ज़ीस्त मद्धम है अभी तू नम न कर आँखें

रेनू नय्यर

ज़ियादा पास मत आना

रहमान फ़ारिस

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.