घर Poetry (page 48)

दम-ए-यार ता-नज़'अ भर लीजिए

सख़ी लख़नवी

कभी कभी

सज्जाद ज़हीर

दुआओं में असर बाक़ी न आहों में असर बाक़ी

सज्जाद शम्सी

शहर के आबाद सन्नाटों की वहशत देख कर

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ज़बाँ को ज़ाइका-ए-शेर-ए-तर नहीं मिलता

सज्जाद बाक़र रिज़वी

वो घिर के आया घटाओं की तीरगी की तरह

सज्जाद बाक़र रिज़वी

शो'ला सा कोई बर्क़-ए-नज़र से नहीं उठता

सज्जाद बाक़र रिज़वी

जुर्म-ए-इज़हार-ए-तमन्ना आँख के सर आ गया

सज्जाद बाक़र रिज़वी

इश्क़ तो सारी उम्र का इक पेशा निकला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

इस दिल को क्या कहें कि जिधर था उधर न था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

चाहत जी का रोग है प्यारे जी को रोक लगाओ क्यूँ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हमें तो कल किसी अगले नगर पहुँचना है

सज्जाद बलूच

चहचहाती चंद चिड़ियों का बसर था पेड़ पर

सज्जाद बलूच

इक हवा उट्ठेगी सारे बाल-ओ-पर ले जाएगी

सज्जाद बाबर

भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले

सज्जाद बाबर

वो पल ये घड़ी

साजिदा ज़ैदी

वफ़ा-ओ-मेहर-ओ-अल्ताफ़-ओ-करम थे हम-इनाँ क्या क्या

साजिदा ज़ैदी

रहता है आस-पास सवेरे से शाम तक

साजिद सजनी

तारे सारे रक़्स करेंगे चाँद ज़मीं पर उतरेगा

साजिद हाश्मी

सर-ए-ख़याल मैं जब भूल भी गई कि मैं हूँ

साइमा असमा

कुछ बे-नाम तअल्लुक़ जिन को नाम अच्छा सा देने में

साइमा असमा

दयार-ए-दिल से किसी का गुज़र ज़रूरी था

साइम जी

अपने अंजाम से बे-ख़बर ज़िंदगी

सैलानी सेवते

जब तसव्वुर में न पाएँगे तुम्हें

सैफ़ुद्दीन सैफ़

दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या

सैफ़ुद्दीन सैफ़

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

साए जो संग-ए-राह थे रस्ते से हट गए

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

क्यूँ जल-बुझे कहीं तो गिरफ़्तार बोलते

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

दिल के शजर को ख़ून से गुलनार देख कर

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

अश्कों में क़लम डुबो रहा है

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

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