गुबार Poetry (page 15)

सराब-ए-मअनी-ओ-मफ़्हूम में भटकते हैं

असलम महमूद

मिज़ा पे ख़्वाब नहीं इंतिज़ार सा कुछ है

असलम महमूद

ऐ मिरे ग़ुबार-ए-सर तू ही तो नहीं तन्हा राएगाँ तो मैं भी हूँ

असलम महमूद

अंजाम

असलम आज़ाद

ऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चल

असलम अंसारी

वो रंग उड़े हैं कुछ अब के बरस बहारों के

असलम अंसारी

बुझी है आतिश-ए-रंग-ए-बहार आहिस्ता आहिस्ता

असलम अंसारी

जिस दम तिरे कूचे से हम आन निकलते हैं

आसिफ़ुद्दौला

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे

असअ'द बदायुनी

हुस्न से शरह हुई इश्क़ के अफ़्साने की

आरज़ू लखनवी

यक़ीन-ए-सुब्ह-ए-चमन है कितना शुऊर-ए-अब्र-ए-बहार क्या है

अर्शी भोपाली

पूछा सबा से उस ने पता कू-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

इश्क़ में तेरे जान-ए-ज़ार हैफ़ है मुफ़्त में चली

अरशद अली ख़ान क़लक़

ग़ज़ल में जान पड़ी गुफ़्तुगू में फूल खिले

अरशद अब्दुल हमीद

ये आइना था मगर ग़म की रहगुज़ार में था

अर्श सहबाई

असर मिरी ज़बान में नहीं रहा

अक़ील शादाब

गुम कर दें इक ज़रा तुझे ख़्वाबों के शहर में

अनवर मीनाई

देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था

अनवर देहलवी

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़

जब तक फ़सील-ए-जिस्म का दर खुल न जाएगा

अंजुम ख़लीक़

और कुछ याद नहीं अब से न तब से पूछो

अंजुम इरफ़ानी

परवरदिगार दे मुझे ग़ैरत-शिआ'र आँख

अनीसा बेगम

एक नज़्म

अनीस नागी

बशर को मशअ'ल-ए-ईमाँ से आगही न मिली

आनंद नारायण मुल्ला

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते

अमजद इस्लाम अमजद

दर-ए-काएनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है

अमजद इस्लाम अमजद

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