गुल Poetry (page 13)

ता-सहर की है फ़ुग़ाँ जान के ग़ाफ़िल मुझ को

तअशशुक़ लखनवी

न डरे बर्क़ से दिल की है कड़ी मेरी आँख

तअशशुक़ लखनवी

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

अपनी फ़रहत के दिन ऐ यार चले आते हैं

तअशशुक़ लखनवी

निगाह ओ दिल में वही कर्बला का मंज़र था

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

साहब की बिपता

सय्यद ज़मीर जाफ़री

इक रेल के सफ़र की तस्वीर खींचता हूँ

सय्यद ज़मीर जाफ़री

तजर्बात-ए-तल्ख़ ने हर-चंद समझाया मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है जिस हंगाम से

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ इस क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ ईं क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

वो जब आप से अपना पर्दा करें

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

वही गुल है गुलिस्ताँ में वही है शम्अ' महफ़िल में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

तेरे दर से मैं उठा लेकिन न मेरा दिल उठा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ले के अपनी ज़ुल्फ़ को वो प्यारे प्यारे हाथ में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

हम को हवस-ए-जल्वा-गाह-ए-तूर नहीं है

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे

सय्यद शकील दस्नवी

ऐसा भी नहीं दर्द के मारे नहीं देखे

सय्यद सादिक़ अली हसीन

मिरी जाँ सरसरी मिलने से क्या मालूम होता है

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

दिल-ए-मुज़्तर की दवा कीजिएगा

सय्यद नवाब हैदर नक़वी

तर्क-ए-उल्फ़त में कोई यकता न था

सय्यद मुनीर

नज़र पे बैठ गया जो ग़ुबार किस का था

सय्यद मुनीर

अब्र का माहताब का भी था

सय्यद मुनीर

ज़िंदगी की हर नफ़स में बे-कली तेरे बग़ैर

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

इर्तिक़ा

सय्यद मुबारक शाह

मिज़ाज-ए-हुस्न में यारब तू प्यार पैदा कर

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

चैन कब आता है घर में तिरे दीवाने को

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

रंगून का मुशाएरा

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

मैं एक आँसू इकट्ठा कर रहा हूँ

सय्यद काशिफ़ रज़ा

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