गुल Poetry (page 11)
बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत
उमर अंसारी
बसंत और होली की बहार
उफ़ुक़ लखनवी
देखा है कहीं रंग-ए-सहर वक़्त से पहले
तुर्फ़ा क़ुरैशी
शिद्दत-ए-इज़हार-ए-मज़मूँ से है घबराई हुई
तुफ़ैल बिस्मिल
नूर-जहाँ का मज़ार
तिलोकचंद महरूम
ख़ाक-ए-हिंद
तिलोकचंद महरूम
वो दिल कहाँ है अहल-ए-नज़र दिल कहें जिसे
तिलोकचंद महरूम
कम न थी सहरा से कुछ भी ख़ाना-वीरानी मिरी
तिलोकचंद महरूम
इस का गिला नहीं कि दुआ बे-असर गई
तिलोकचंद महरूम
काश इक शब के लिए ख़ुद को मयस्सर हो जाएँ
तौसीफ़ तबस्सुम
इस पार जहान-ए-रफ़्तगाँ है
तौसीफ़ तबस्सुम
दिल की बात न मानी होती इश्क़ किया क्यूँ पीरी में
तौसीफ़ तबस्सुम
इस बार हुआ कुन का असर और तरह का
तसनीम आबिदी
नाम लोगे जो याँ से जाने का
मीर तस्कीन देहलवी
गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते
मीर तस्कीन देहलवी
जीना क्या है पिछ्ला क़र्ज़ उतार रहा हूँ
तारिक़ नईम
हवा का हुक्म भी अब के नज़र में रक्खा जाए
तारिक़ नईम
लहू को पालते फिरते हैं हम हिना की तरह
तारिक़ मसऊद
बुझे तो दिल भी थे पर अब दिमाग़ बुझने लगे
तारिक़ बट
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिए
तनवीर अंजुम
ख़्वाब तो ख़्वाब है ता'बीर बदल जाती है
तनवीर अहमद अल्वी
माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या ख़ून-ए-जिगर के सामने
तालिब हुसैन तालिब
मुझ को दिमाग़-ए-गर्मी-ए-बाज़ार है कहाँ
तालिब चकवाली
रौनक़ें आबादियाँ क्या क्या चमन की याद हैं
तालिब अली खान ऐशी
नज़ारगी-ए-शौक़ ने दीदार में खींचा
तालीफ़ हैदर
न बे-कली का हुनर है न जाँ-फ़ज़ाई का
तालीफ़ हैदर
हम जब्र-ए-मोहब्बत से गुरेज़ाँ नहीं होते
तालीफ़ हैदर
आहिस्ता-रवी शहर को काहिल न बना दे
तालीफ़ हैदर
बेगानगी में यूँही गुज़ारा करेंगे हम
तलअत इशारत
शुऊ'र-ए-तिश्नगी को आम कर दो
ताज भोपाली
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