गुल Poetry (page 21)

मसल कर फेंक दूँ आँखें तो कुछ तनवीर हो पैदा

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

लग़्ज़िश पा-ए-होश का हर्फ़-ए-जवाज़ ले के हम

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

ये अर्ज़-ओ-समा क़ुलज़ुम-ओ-सहरा मुतहर्रिक

शम्स रम्ज़ी

ये क्या अंदाज़ हैं दस्त-ए-जुनून-ए-फ़ित्ना-सामाँ के

शम्स इटावी

हुस्न की बिजलियाँ अल-अमाँ अल-अमाँ

शम्स इटावी

किसी के वादा-ए-फ़र्दा में गुम है इंतिज़ार अब भी

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

दूर फ़ज़ा में एक परिंदा खोया हुआ उड़ानों में

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

हिचकियाँ लेता हुआ दुनिया से दीवाना चला

शमीम तारिक़

ज़मीं को खींच के मैं सू-ए-आसमाँ ले जाऊँ

शमीम रविश

रौशनी तेज़ करो

शमीम करहानी

समझे है मफ़्हूम नज़र का दिल का इशारा जाने है

शमीम करहानी

पी कर भी तबीअत में तल्ख़ी है गिरानी है

शमीम करहानी

निगार-ए-मह-वश ओ महबूब-ए-लाला-रू की तरह

शमीम करहानी

हुजूम-ए-दर्द में ख़ंदाँ है कौन मेरे सिवा

शमीम करहानी

हमीं थे ऐसे सर-फिरे हमीं थे ऐसे मनचले

शमीम करहानी

दर्द-शनास दिल नहीं जल्वा-तलब नज़र नहीं

शमीम करहानी

फ़ुर्क़त की भयानक रातों को इस तरह गुज़ारा करता हूँ

शमीम जयपुरी

सफ़र नसीब अगर हो तो ये बदन क्यूँ है

शमीम हनफ़ी

रोज़ ओ शब की गुत्थियाँ आँखों को सुलझाने न दे

शमीम हनफ़ी

आसमाँ का रंग मेरी ज़ात में घुल जाएगा

शमीम फ़ारूक़ी

जाते कहाँ जुनून के तूफ़ाँ में आ गए

शाकिर इनायती

रोज़ शाम होती है रोज़ हम सँवरते हैं

शकीला बानो

ज़िंदगी यूँ तो बहुत अय्यार थी चालाक थी

शकील शम्सी

आज उस बज़्म में यूँ दाद-ए-वफ़ा दी जाए

शकील ग्वालिआरी

मेरा अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शोलों का डर नहीं

शकील बदायुनी

रक़्क़ासा-ए-हयात से

शकील बदायुनी

कहाँ है आ जा

शकील बदायुनी

ज़मीं पर फ़स्ल-ए-गुल आई फ़लक पर माहताब आया

शकील बदायुनी

ये तमाम ग़ुंचा-ओ-गुल मैं हँसूँ तो मुस्कुराएँ

शकील बदायुनी

उन से उम्मीद-ए-रू-नुमाई है

शकील बदायुनी

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