हुआ Poetry (page 40)

यही था वक़्फ़ तिरी महफ़िल-ए-तरब के लिए

सय्यद आबिद अली आबिद

वाइज़-ए-शहर ख़ुदा है मुझे मा'लूम न था

सय्यद आबिद अली आबिद

नग़्मा ऐसा भी मिरे सीना-ए-सद-चाक में है

सय्यद आबिद अली आबिद

हम बिन ग़म-ए-यार भी जिए हैं

सय्यद आबिद अली आबिद

चैन पड़ता है दिल को आज न कल

सय्यद आबिद अली आबिद

वो लौट आई है ऑफ़िस से हिज्र ख़त्म हुआ

स्वप्निल तिवारी

वो जहाँ हैं वहीं ख़याल मिरा

स्वप्निल तिवारी

उस के होंटों पर सुर महका करते हैं

स्वप्निल तिवारी

समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर

स्वप्निल तिवारी

मेरे होंटों को छुआ चाहती है

स्वप्निल तिवारी

मिरे घर में न होगी रौशनी क्या

स्वप्निल तिवारी

कहीं खो न जाना ज़रा दूर चल के

स्वप्निल तिवारी

वापस घर जा ख़त्म हुआ

सालेह नदीम

रंज इस का नहीं कि हम टूटे

सूर्यभानु गुप्त

दिल लगाने की भूल थे पहले

सूर्यभानु गुप्त

गुलज़ार-ए-वतन

सुरूर जहानाबादी

किसी मस्त-ए-ख़्वाब का है अबस इंतिज़ार सो जा

सुरूर जहानाबादी

ख़्वाब देखता हूँ

सुरूर बाराबंकवी

यही नहीं कि मिरा दिल ही मेरे बस में न था

सुरूर बाराबंकवी

चमन वालों को रक़्साँ-ओ-ग़ज़ल-ख़्वाँ ले के उट्ठी है

सुरूर बाराबंकवी

एक दिन मेरा आईना मुझ को

सुरेन्द्र शजर

अपनी अना के गुम्बद-ए-बे-दर में बंद है

सूरज तनवीर

आईना देखना

सूरज नारायण मेहर

याद है इक एक लम्हे का खिचाव देखना

सूरज नारायण

नोक-ए-शमशीर की घात का सिलसिला यूँ पस-ए-आइना कल उतारा गया

सूरज नारायण

डालता अद्ल की झोली में स्याही कैसे

सूरज नारायण

किसी के ख़्वाब का साया था काफ़ी वक़्त हुआ

सुनील कुमार जश्न

रंग होने लगे ज़ाहिर मेरे

सुनील आफ़ताब

ठंडी है या गर्म हवा है

सुल्तान सुकून

जब वो तन्हा कभी हुआ होगा

सुल्तान सुकून

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