प्रेम Poetry (page 20)

हुस्न जब क़ातिल न था और इश्क़ दीवाना न था

शोला हस्पानवी

हाँ ऐ ग़म-ए-इश्क़ मुझ को पहचान

शोहरत बुख़ारी

हर-चंद सहारा है तिरे प्यार का दिल को

शोहरत बुख़ारी

बे-नश्शा बहक रहा हूँ कब से

शोहरत बुख़ारी

ऐश-ए-दुनिया का जब शुमार न था

शोहरत बुख़ारी

यहाँ रहने में दुश्वारी बहुत है

शोएब निज़ाम

तमाम ख़ुशियाँ तमाम सपने हम एक दूजे के नाम कर के

शमशाद शाद

क़ल्ब का एहतिजाज होता है

शमशाद शाद

ख़ून-ए-दिल होता रहा ख़ून-ए-जिगर होता रहा

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

इश्क़ में ऐसी करामात कहाँ थी पहले

शिव दयाल सहाब

दाग़ हुस्न-ए-क़मर भी होता है

शिव दयाल सहाब

न जब तक दर्द-ए-इंसाँ से किसी को आगही होगी

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

ना-तवाँ इश्क़ ने आख़िर किया ऐसा हम को

शिबली नोमानी

मौसम भी ख़ुश-गवार ज़माना भी रास है

शेवन बिजनौरी

सोज़-ए-अलम से दूर हुआ जा रहा हूँ मैं

शेरी भोपाली

दम-ए-अख़ीर भी हम ने ज़बाँ से कुछ न कहा

शेर सिंह नाज़ देहलवी

बातों में ढूँडते हैं वो पहलू मलाल का

शेर सिंह नाज़ देहलवी

बातों में ढूँडते हैं वो पहलू मलाल का

शेर सिंह नाज़ देहलवी

पहुँचा है आज क़ैस का याँ सिलसिला मुझे

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

दार है मर्द-ए-अनल-हक़ का वतन

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

ये इक़ामत हमें पैग़ाम-ए-सफ़र देती है

ज़ौक़

वक़्त-ए-पीरी शबाब की बातें

ज़ौक़

क़ुफ़्ल-ए-सद-ख़ाना-ए-दिल आया जो तू टूट गए

ज़ौक़

नीमचा यार ने जिस वक़्त बग़ल में मारा

ज़ौक़

नहीं सबात बुलंदी-ए-इज्ज़-ओ-शाँ के लिए

ज़ौक़

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

लेते ही दिल जो आशिक़-ए-दिल-सोज़ का चले

ज़ौक़

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले

ज़ौक़

कोई कमर को तिरी कुछ जो हो कमर तो कहे

ज़ौक़

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