चलो चलें Poetry (page 10)

दर्द की लय को बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

तनवीर अहमद अल्वी

बज़्म-ए-जाँ फिर निगह-ए-तौबा-शिकन माँगे है

तनवीर अहमद अल्वी

अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है

तनवीर अहमद अल्वी

जिहत को बे-जिहती के हुनर ने छीन लिया

तालिब जोहरी

ख़िश्त-ए-जाँ दरमियान लाने में

तालिब हुसैन तालिब

कट गई उम्र यही एक तमन्ना करते

तल्हा रिज़वी बारक़

न बे-कली का हुनर है न जाँ-फ़ज़ाई का

तालीफ़ हैदर

हम हिज्र के रस्तों की हवा देख रहे हैं

तालीफ़ हैदर

बस एक शय मिरे अंदर तमाम होती हुई

तालीफ़ हैदर

हर अश्क तिरी याद का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

तख़्त सिंह

दूर तक परछाइयाँ सी हैं रह-ए-अफ़्कार पर

तख़्त सिंह

शिकवा न हो तसलसुल-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ रहे

तजम्मुल हुसैन अख़्तर

मसअला ये भी तो है इस अहद का ऐ जान-ए-जाँ

ताज सईद

जी में आता है कि चल कर जंगलों में जा रहें

ताज सईद

ये लोग करते हैं मंसूब जो बयाँ तुझ से

तैमूर हसन

ला-यख़ुल

तहसीन फ़िराक़ी

तो तय हुआ ना कि जब भी लिखना रुतों के सारे अज़ाब लिखना

ताहिर तोनस्वी

मैं उस की मोहब्बत से इक दिन भी मुकर जाता

ताहिर अज़ीम

इक परेशानी अलग थी और पशेमानी अलग

तफ़ज़ील अहमद

इक उम्र हुई और मैं अपने से जुदा हूँ

ताबिश सिद्दीक़ी

धूमें मचाएँ सब्ज़ा रौंदें फूलों को पामाल करें

ताबिश देहलवी

अश्कों के गुहर यूँ सर-ए-मिज़्गाँ भी न तोलें

तबस्सुम रिज़वी

शरह-ए-जाँ-सोज़-ए-ग़म-ए-अर्ज़-ए-वफ़ा क्या करते

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

लुत्फ़ ये है जिसे आशोब-ए-जहाँ कहता हूँ

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

मुझे आता है रोना ऐसी तन्हाई पे ऐ 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

नहीं कोई दोस्त अपना यार अपना मेहरबाँ अपना

ताबाँ अब्दुल हई

वो इंतिहा के हैं नाज़ुक मैं सख़्त-जाँ हूँ कमाल

तअशशुक़ लखनवी

उन्स है ख़ाना-ए-सय्याद से गुलशन कैसा

तअशशुक़ लखनवी

मुझ में आ कर ठहर गया कोई

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

जिस्म ओ जाँ सुलगते हैं बारिशों का मौसम है

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

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