शरीर Poetry (page 33)

तो ऐसा क्यूँ नहीं करते

बशर नवाज़

जाने क्या देखा था मैं ने ख़्वाब में

बशर नवाज़

उर्यां हरारत-ए-तप-ए-फ़ुर्क़त से मैं रहा

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

देखी जो ज़ुल्फ़-ए-यार तबीअत सँभल गई

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

सुबुक-सरी में भी अंदेशा-ए-हवा रखना

बाक़र नक़वी

निरवान

बाक़र मेहदी

दीमक

बाक़र मेहदी

दीवानगी की राह में गुम-सुम हुआ न था!

बाक़र मेहदी

इत्तिफ़ाक़

बलराज कोमल

ड्रग स्टोर

बलराज कोमल

दीदा-ए-तर

बलराज कोमल

खोया खोया उदास सा होगा

बलराज कोमल

आसमाँ पर काले बादल छा गए

बद्र-ए-आलम ख़लिश

दीवार-ओ-दर का नाम था कोई मकाँ न था

बदनाम नज़र

मुझ को नहीं मालूम कि वो कौन है क्या है

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

जिसे भी देखिए प्यासा दिखाई देता है

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

है बहुत मुश्किल निकलना शहर के बाज़ार में

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

अब अपनी चीख़ भी क्या अपनी बे ज़बानी क्या

अज़रा परवीन

कैसे कैसे स्वाँग रचाए हम ने दुनिया-दारी में

अज़रा नक़वी

तुम्हारे आने के ब'अद

अज़रा अब्बास

तुम हँसते क्यूँ हो

अज़रा अब्बास

टुकड़ों में बटी हुई ज़िंदगी

अज़रा अब्बास

मुझे तक़्सीम कर दो

अज़रा अब्बास

मेल उतारना मुश्किल लगता है

अज़रा अब्बास

फ़ीमेल बुल-फ़ाइटर

अज़रा अब्बास

एक ज़िंदगी और मिल जाए

अज़रा अब्बास

एक नज़्म लिखना मुश्किल है

अज़रा अब्बास

मेरे जिस्म से वक़्त ने कपड़े नोच लिए

अज़्म शाकरी

अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ

अज़्म शाकरी

चाँद सा चेहरा कुछ इतना बेबाक हुआ

अज़्म शाकरी

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