जुदाई Poetry (page 6)

मौसम-ए-गुल भी मिरे घर आया

रशीद कामिल

देता है मुझ को चर्ख़-ए-कुहन बार बार दाग़

रंजूर अज़ीमाबादी

नुक़रई उजाले पर सुरमई अंधेरा है

रमेश कँवल

कभी बुलाओ, कभी मेरे घर भी आया करो

रमेश कँवल

चमकती आँख में सहरा दिखाई साफ़ देता है

राजेन्द्र मनचंदा बानी

मरीज़-ए-हिज्र को सेहत से अब तो काम नहीं

रजब अली बेग सुरूर

बता क्या क्या तुझे ऐ शौक-ए-हैराँ याद आता है

रईस अमरोहवी

दिल छोड़ के हर राहगुज़र ढूँढ रहा हूँ

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

चाँद और चकोर

राही मासूम रज़ा

जिस का चेहरा गुलाब जैसा है

इक़बाल पयाम

कभी कसक जुदाई की कभी महक विसाल की

इक़बाल अशहर

उस के नाम जिसे तारीकी निगल चुकी

इंजिला हमेश

किसी का दिल को रहा इंतिज़ार सारी रात

इम्दाद इमाम असर

जफ़ाएँ होती हैं घुटता है दम ऐसा भी होता है

इम्दाद इमाम असर

वक़्त-ए-आख़िर हमें दीदार दिखाया न गया

इमदाद अली बहर

महरम के सितारे टूटते हैं

इमदाद अली बहर

ऐसे पुर-नूर-ओ-ज़िया यार के रुख़्सारे हैं

इमदाद अली बहर

ये वस्ल की रुत है कि जुदाई का है मौसम

इफ़्तिख़ार राग़िब

छोड़ा न मुझे दिल ने मिरी जान कहीं का

इफ़्तिख़ार राग़िब

वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी

इफ़्तिख़ार आरिफ़

एक दिन ख़्वाब-नगर जाना है

इदरीस बाबर

दोस्त कुछ और भी हैं तेरे अलावा मिरे दोस्त

इदरीस बाबर

ये तकल्लुफ़ ये मुदारात समझ में आए

इबरत मछलीशहरी

कातिक का चाँद

इब्न-ए-इंशा

मुझे तेरी जुदाई का ये सदमा मार डालेगा

हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी

छुप के उस ने जो ख़ुद-नुमाई की

हसरत मोहानी

और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के

हसरत मोहानी

हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं

हसरत जयपुरी

क़ासिद-ए-ख़ुश-फ़ाल लाया उस के आने की ख़बर

हसरत अज़ीमाबादी

ख़्वाब ठहरा सर-ए-मंज़िल न तह-ए-बाम कभी

हसन नईम

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