काम Poetry (page 20)

जो आँखों के तक़ाज़े हैं वो नज़्ज़ारे बनाता हूँ

सलीम अहमद

इश्क़ में जिस के ये अहवाल बना रक्खा है

सलीम अहमद

दीदनी है हमारी ज़ेबाई

सलीम अहमद

मज़दूर लड़की

सलाम मछली शहरी

पहली नज़्म

सलाहुद्दीन परवेज़

ना-ख़ुश जो हो गुल-बदन किसी का

सख़ी लख़नवी

कभी कभी

सज्जाद ज़हीर

यही सुनते आए हैं हम-नशीं कभी अहद-ए-शौक़-ए-कमाल में

सज्जाद बाक़र रिज़वी

क्या मिला ऐ ज़िंदगी क़ानून-ए-फ़ितरत से मुझे

सज्जाद बाक़र रिज़वी

क्या इश्क़ का लें नाम हवस आम नहीं है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हो दिल-लगी में भी दिल की लगी तो अच्छा है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

'बाक़र' निशाना-ए-ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम तो हो

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अँधेरे दिन की सफ़ारत को आए हैं अब के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

रहता है आस-पास सवेरे से शाम तक

साजिद सजनी

तारे सारे रक़्स करेंगे चाँद ज़मीं पर उतरेगा

साजिद हाश्मी

दोस्तो के काम आना जुर्म है

साजिद असर

नक़्श जब ज़ख़्म बना ज़ख़्म भी नासूर हुआ

साइमा असमा

रुख़ पे यूँ झूम कर वो लट जाए

सैफ़ुद्दीन सैफ़

कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

चैन अब मुझ को तह-ए-दाम तो लेने देते

सैफ़ुद्दीन सैफ़

कोई मक़ाम नहीं हद्द-ए-ए'तिबार के बा'द

सैफ़ बिजनोरी

ये क्यूँकर मान लें उल्फ़त हमें करनी नहीं आती

साहिर सियालकोटी

फ़िक्र-ए-ज़र में बिलकता हुआ आदमी

साहिर शेवी

विर्सा

साहिर लुधियानवी

तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा

साहिर लुधियानवी

माज़ूरी

साहिर लुधियानवी

हम-अस्र

साहिर लुधियानवी

'गाँधी' हो या 'ग़ालिब' हो

साहिर लुधियानवी

एहसास-ए-कामराँ

साहिर लुधियानवी

दीवारों का जंगल जिस का आबादी है नाम

साहिर लुधियानवी

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