काम Poetry (page 22)

अक्स पानी में अगर क़ैद किया जा सकता

साबिर ज़फ़र

मिरे ध्यान में है इक महल कहीं चौबारों का

साबिर वसीम

इक शक्ल बे-इरादा सर-ए-बाम आ गई

साबिर वसीम

ख़ूबियों को मस्ख़ कर के ऐब जैसा कर दिया

साबिर

ये दिल की दास्तान है कि दिल ग़ुलाम कर दिया

सबीहा सबा, पाकिस्तान

मैं दरिया हूँ मगर दोनों तरफ़ साहिल है तन्हाई

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

बाल-ओ-पर की जुम्बिशों को काम में लाते रहो

सबा अकबराबादी

चला-चल मोहलत-ए-आराम क्या है

सबा अकबराबादी

हँसी की बात कि उस ने वहाँ बुला के मुझे

सादुल्लाह शाह

ये किस हसीन ने लोगों को रोक रक्खा है

रूही कंजाही

तुझ पे हर हाल में मरना चाहूँ

रूही कंजाही

किसी भी काम का मेरा हुनर नहीं न सही

रूही कंजाही

बाग़बाँ काम हमें क्या है वो उजड़े कि रहे

रियाज़ ख़ैराबादी

अज़ाँ का काम चल जाए जो नाक़ूस-ए-बरहमन से

रियाज़ ख़ैराबादी

ये गवारा कि मिरा दस्त-ए-तमन्ना बाँधे

रियाज़ ख़ैराबादी

उतरी है आसमाँ से जो कल उठा तो ला

रियाज़ ख़ैराबादी

रंग पर कल था अभी लाला-ए-गुलशन कैसा

रियाज़ ख़ैराबादी

पैमाने में वो ज़हर नहीं घोल रहे थे

रियाज़ ख़ैराबादी

मेरे पहलू में हमेशा रही सूरत अच्छी

रियाज़ ख़ैराबादी

मर कर अरे वाइज़ कोई ज़िंदा नहीं होता

रियाज़ ख़ैराबादी

कोई पूछे न हम से क्या हुआ दिल

रियाज़ ख़ैराबादी

दुनिया से अलग हम ने मयख़ाने का दर देखा

रियाज़ ख़ैराबादी

दिल ढूँढती है निगह किसी की

रियाज़ ख़ैराबादी

आप आए तो ख़याल-ए-दिल-ए-नाशाद आया

रियाज़ ख़ैराबादी

रक्खो ख़िदमत में मुझ से काम तो लो

रिन्द लखनवी

ख़ामोश दाब-ए-इश्क़ को बुलबुल लिए हुए

रिन्द लखनवी

हैं ये सारे जीते-जी के वास्ते

रिन्द लखनवी

छुप के घर ग़ैर के जाया न करो

रिन्द लखनवी

वक़्त ख़ुश-ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए

रियाज़ मजीद

चराग़-ए-ज़ीस्त मद्धम है अभी तू नम न कर आँखें

रेनू नय्यर

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