काम Poetry (page 18)

तारे जो आसमाँ से गिरे ख़ाक हो गए

शाद आरफ़ी

क्या करें गुलशन पे जोबन ज़ेर-ए-दाम आया तो क्या

शाद आरफ़ी

यही बस एक दुआ माँगना नहीं आता

सीन शीन आलम

फिर आ गया ज़बाँ पे वही नाम क्या करें

सीमाब सुल्तानपुरी

रोज़ कहता हूँ कि अब उन को न देखूँगा कभी

सीमाब अकबराबादी

माज़ी-ए-मरहूम की नाकामियों का ज़िक्र छोड़

सीमाब अकबराबादी

शाम-ए-फ़ुर्क़त इंतिहा-ए-गर्दिश-ए-अय्याम है

सीमाब अकबराबादी

रोज़-ए-फ़िराक़ हर तरफ़ इक इंतिशार था

सीमाब अकबराबादी

मुझे मुश्किल में यूँ अंदाज़ा-ए-मुश्किल नहीं होता

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

जिधर वो हैं उधर हम भी अगर जाएँ तो क्या होगा

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

इस कश्मकश से दाम के क्या काम था हमें

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तुझ बिन बहुत ही कटती है औक़ात बे-तरह

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ने ग़रज़ कुफ़्र से रखते हैं न इस्लाम से काम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मस्त-ए-सहर ओ तौबा-कुनाँ शाम का हूँ मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जिस दम वो सनम सवार होवे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गदा दस्त-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हिसाब-ए-तर्क-तअल्लुक़ तमाम मैं ने किया

सऊद उस्मानी

हर रोज़ इम्तिहाँ से गुज़ारा तो मैं गया

सऊद उस्मानी

साक़ी की हर निगाह में सहबा थी जाम था

सत्यपाल जाँबाज़

फूल खिले हैं मौसम बदला सहरा के वीरानों का

सरवर नेपाली

यहाँ मज़ाफ़ात में

सरवत हुसैन

मैं तुम्हें याद कर रहा था

सरवत हुसैन

लफ़्ज़ों के दरमियान

सरवत हुसैन

ये जो तालाब है दरिया था कभी

सरफ़राज़ ज़ाहिद

भँवर में मशवरे पानी से लेता हूँ

सरफ़राज़ ज़ाहिद

उसी से पूछो उसे नींद क्यूँ नहीं आती

सरफ़राज़ ख़ालिद

बादा-ओ-जाम के रहे ही नहीं

सरफ़राज़ ख़ालिद

आँखों में अगर आप की सूरत नहीं होती

सरफ़राज़ अबद

जहाँ सुल्ताना पढ़ती थी

सरफ़राज़ शाहिद

दफ़्तर-ए-शादी का मुन्तज़िम

सरफ़राज़ शाहिद

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