काम Poetry (page 16)

हर किसी ख़्वाब के चेहरे पे लिखूँ नाम तिरा

शहनवाज़ ज़ैदी

बिन माँगे मिल रहा हो तो ख़्वाहिश फ़ुज़ूल है

शाहिद ज़की

दश्त-ए-वहशत को फिर आबाद करूँगा इक दिन

शाहिद कमाल

कोरे काग़ज़ पे मिरा नक़्श उतारे कोई

शाहिद कलीम

अंधेरे घर में चराग़ों से कुछ न काम लिया

शाहिद कलीम

मिरी नज़र कि तरह दिल परिंद ओझल है

शाहिद जमील

जाने क्या वज्ह-ए-बेगानगी है

शाहिद इश्क़ी

तेरी फ़य्याज़ी के थे चर्चे बहुत मैं ने सुने

शाहिद ग़ाज़ी

ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़

शाहिद अहमद शोएब

ऐ निगार-ए-ग़म-ओ-आलाम तिरी उम्र दराज़

शाहिद अहमद शोएब

दुनिया तो ये कहती है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दुनिया ने बस थका ही दिया काम कम हुए

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

नक़्श था और नाम था ही नहीं

शाहीन अब्बास

मोहब्बत में न जाने क्यूँ हमें फ़ुर्सत ज़ियादा है

शाहीन अब्बास

गुज़रे नहीं और गुज़र गए हम

शाहीन अब्बास

दिए का काम अब आँखें दिखाना रह गया है

शाहीन अब्बास

दाने के बा'द कुछ नहीं दाम के बा'द कुछ नहीं

शाहीन अब्बास

ऐसा नहीं कि उस ने बनाया नहीं मुझे

शाहीन अब्बास

हम क़ुव्वत-ए-जज़्ब-ए-दिल दिखाएँ

शहाबुद्दीन साक़िब

सूरज का शहर

शहाब जाफ़री

इश्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो हो

शाह नियाज़ अहमद नियाज़

सय्याद के जिगर में करे था सिनाँ का काम

शाह नसीर

ग़रज़ न फ़ुर्क़त में कुफ़्र से थी न काम इस्लाम से रहा था

शाह नसीर

दूद-ए-आह-ए-जिगरी काम न आया यारो

शाह नसीर

देख तू यार-ए-बादा-कश मैं ने भी काम क्या किया

शाह नसीर

ज़ुल्फ़ छुटती तिरे रुख़ पर तो दिल अपना फिरता

शाह नसीर

तिरे दाँत सारे सफ़ेद हैं पए-ज़ेब पान से मल कर आ

शाह नसीर

शमीम-ए-ज़ुल्फ़-ए-मुअम्बर जो रू-ए-यार से लूँ

शाह नसीर

कभू न उस रुख़-ए-रौशन पे छाइयाँ देखीं

शाह नसीर

जो ऐन वस्ल में आराम से नहीं वाक़िफ़

शाह नसीर

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