काम Poetry (page 14)

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

लुत्फ़-ए-निगाह-ए-नाज़ की तोहमत उठाए कौन

शकील बदायुनी

ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया

शकील बदायुनी

जल्वा-ए-हुस्न-ए-करम का आसरा करता हूँ मैं

शकील बदायुनी

हंगामा-ए-ग़म से तंग आ कर इज़हार-ए-मसर्रत कर बैठे

शकील बदायुनी

बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी है

शकील बदायुनी

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

शकील बदायुनी

आदमी न इतना भी दूर हो ज़माने से

शकील बदायुनी

ये जल्वा-गाह-ए-नाज़ तमाशाइयों से है

शकेब जलाली

वो सामने था फिर भी कहाँ सामना हुआ

शकेब जलाली

क्या चीज़ है ये सई-ए-पैहम क्या जज़्बा-ए-कामिल होता है

शकेब जलाली

जिस दम क़फ़स में मौसम-ए-गुल की ख़बर गई

शकेब जलाली

जब तक ग़म-ए-जहाँ के हवाले हुए नहीं

शकेब जलाली

बस वही लम्हा आँख देखेगी

शाइस्ता यूसुफ़

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तीर-ए-निगह लगा के तुम कहते हो फिर लगा न ख़ूब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तेरे आगे ले चुका ख़ुसरव लब-ए-शीरीं से काम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रखे है शीशा मिरा संग साथ रब्त-ए-क़दीम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं कुफ़्र ओ दीं से गुज़र कर हुआ हूँ ला-मज़हब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कोहकन जाँ-कनी है मुश्किल काम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हैराँ हैं अपने अपने जो देखा सो काम में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

है राह-ए-आशिक़ी तारीक और बारीक और सुकड़ी

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तुम्हारे इश्क़ में हम नंग-ओ-नाम भूल गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तू जो कहता है बोलता क्या है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरा दिल यार अगर माइल करे है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रखता हूँ मैं हक़ पर नज़र कोई कुछ कहो कोई कुछ कहो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

ने शिकवा-मंद दिल से न अज़-दस्त-दीदा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

न मोहतसिब से ये मुझ को ग़रज़ न मस्त से काम

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

क्यूँकि दीवाना बेड़ियाँ तोड़े

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कशिश से दिल की उस अबरू-कमाँ को हम रखा बहला

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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