समाचार Poetry (page 54)

बदनाम हो रहा हूँ

अख़्तर शीरानी

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर

अख़्तर शीरानी

उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं

अख़्तर शीरानी

सू-ए-कलकत्ता जो हम ब-दिल-ए-दीवाना चले

अख़्तर शीरानी

ला पिला साक़ी शराब-ए-अर्ग़वानी फिर कहाँ

अख़्तर शीरानी

तुम हो या छेड़ती है याद-ए-सहर कोई तो है

अख़्तर सईद ख़ान

तुझे ख़बर नहीं इस बात की अभी शायद

अख़्तर रज़ा सलीमी

दिल ओ निगाह पे तारी रहे फ़ुसूँ उस का

अख़्तर रज़ा सलीमी

ये आने वाला ज़माना हमें बताएगा

अख़्तर नज़्मी

जो बा-ख़बर थे वो देते रहे फ़रेब मुझे

अख़तर मुस्लिमी

कितने महबूब घरों से गए किस को मालूम

अख्तर लख़नवी

कब धूप चली शाम ढली किस को ख़बर है

अख़्तर होशियारपुरी

हमें ख़बर है कोई हम-सफ़र न था फिर भी

अख़्तर होशियारपुरी

ज़मीन पर ही रहे आसमाँ के होते हुए

अख़्तर होशियारपुरी

वो रतजगा था कि अफ़्सून-ए-ख़्वाब तारी था

अख़्तर होशियारपुरी

वो रंग-ए-तमन्ना है कि सद-रंग हुआ हूँ

अख़्तर होशियारपुरी

थी तितलियों के तआ'क़ुब में ज़िंदगी मेरी

अख़्तर होशियारपुरी

मंज़िलों के फ़ासले दीवार-ओ-दर में रह गए

अख़्तर होशियारपुरी

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

एक हम ही तो नहीं आबला-पा आवारा

अख़्तर होशियारपुरी

दश्त-दर-दश्त अक्स-ए-दर है यहाँ

अख़्तर होशियारपुरी

अपना साया भी न हम-राह सफ़र में रखना

अख़्तर होशियारपुरी

मिरी ख़बर तो किसी को नहीं मगर 'अख़्तर'

अख़्तर अंसारी

क्या ख़बर थी इक बला-ए-ना-गहानी आएगी

अख़्तर अंसारी

तवील-तर है सफ़र मुख़्तसर नहीं होता

अख़्तर अमान

चर्ख़ भी छू लें तो जाना है इसी मिट्टी में

अख़लाक़ बन्दवी

अभी अश्कों में ख़ूँ शामिल नहीं है

अख़लाक़ बन्दवी

रू-ब-रू-ए-मर्ग

अख़लाक़ अहमद आहन

ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

ये सारी धूल मिरी है ये सब ग़ुबार मिरा

अकबर मासूम

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