सृष्टि Poetry (page 4)

मिरा नाम क़ैस क्यूँ कर तिरे नाम तक न पहुँचे

रशीद रामपुरी

हैं सर-निगूँ जो ताना-ए-ख़ल्क़-ए-ख़ुदा से हम

रशीद रामपुरी

हैं बे-नियाज़-ए-ख़ल्क़ तिरा दर है और हम

रशीद रामपुरी

ख़ार-ओ-ख़स फेंके चमन के रास्ते जारी करे

रशीद लखनवी

जब से सुना दहन तिरे ऐ माह-रू नहीं

रशीद लखनवी

मुमकिन है वो दिन आए कि दुनिया मुझे समझे

रसा चुग़ताई

मेरी ईज़ा में ख़ुशी जब आप की पाते हैं लोग

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

राज़-ए-हस्ती से आश्ना न हुआ

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

कोई नश्शा न कोई ख़्वाब ख़रीद

राही फ़िदाई

दुनिया ने ज़र के वास्ते क्या कुछ नहीं किया

इक़बाल साजिद

पयाम ले के हवा दूर तक नहीं जाती

इमरान-उल-हक़ चौहान

शोर है उस सब्ज़ा-ए-रुख़्सार का

इमदाद अली बहर

ख़ूब-रूयान-ए-जहाँ चाँद की तनवीरें हैं

इमदाद अली बहर

धुँद

इफ़्तेख़ार जालिब

आख़िरी आदमी का रजज़

इफ़्तिख़ार आरिफ़

कुछ भी नहीं कहीं नहीं ख़्वाब के इख़्तियार में

इफ़्तिख़ार आरिफ़

कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे में

इफ़्तिख़ार आरिफ़

कोई मुज़्दा न बशारत न दुआ चाहती है

इफ़्तिख़ार आरिफ़

दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की

इफ़्तिख़ार आरिफ़

बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगा

इफ़्तिख़ार आरिफ़

हम ने किस दिन तिरे कूचे में गुज़ारा न किया

हसरत मोहानी

सुन तो सही जहाँ में है तेरा अफ़्साना क्या

हैदर अली आतिश

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या

हैदर अली आतिश

सब्ज़ा बाला-ए-ज़क़न दुश्मन है ख़ल्क़ुल्लाह का

हैदर अली आतिश

वस्ल आसान है क्या मुश्किल है

हफ़ीज़ जौनपुरी

हुए ख़ल्क़ जब से जहाँ में हम हवस-ए-नज़ारा-ए-यार है

हबीब मूसवी

उम्र गई उल्फ़त-ए-ज़र जी से इलाही न गई

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

टुक देखियो ये अबरू-ए-ख़मदार वही है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में

गोया फ़क़ीर मोहम्मद

न पूछ हिज्र में जो हाल अब हमारा है

ग़मगीन देहलवी

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