लोग Poetry (page 21)

मिला जो काम ग़म-ए-मो'तबर बनाने का

सलीम अहमद

कुछ हैं मंज़र हाल के कुछ ख़्वाब मुस्तक़बिल के हैं

सलीम अहमद

बन के दुनिया का तमाशा मो'तबर हो जाएँगे

सलीम अहमद

बजा ये रौनक़-ए-महफ़िल मगर कहाँ हैं वो लोग

सलीम अहमद

धुआँ

सलाम मछली शहरी

हम ऐसे लोग जल्द असीर-ए-ख़िज़ाँ हुए

सलाम मछली शहरी

फ़सील-ए-शहर को जब तक गिरा नहीं देंगे

सलाहुद्दीन नय्यर

तुम अगर दो न पैरहन अपना

सख़ी लख़नवी

रौशनी दर पे खड़ी मुझ को बुलाती क्यूँ है

शख़ावत शमीम

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

है दुकान-ए-शौक़ भरी हुई कोई मेहरबाँ हो तो ले के आ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

है जुर्म मोहब्बत तो सज़ा क्यूँ नहीं देते

साजिद सिद्दीक़ी लखनवी

दोस्त अपने हैं लोग अपने हैं

साजिद प्रेमी

कुछ बे-नाम तअल्लुक़ जिन को नाम अच्छा सा देने में

साइमा असमा

बूटा बूटा मुँह खोलेगा पत्ता पत्ता बोलेगा

सैलानी सेवते

तिरी नज़र से ज़माने बदलते रहते हैं

सैफ़ुद्दीन सैफ़

एक से एक है ग़ारत-गर-ए-ईमान यहाँ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

वफ़ा ख़ुलूस मोहब्बत इबादतें उस की

सैफ़ी सरौंजी

दिल के शजर को ख़ून से गुलनार देख कर

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

बेचैन हूँ ख़ूँनाबा-फ़िशानी में घिरा हूँ

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

किस लुत्फ़ से महफ़िल में बिठाए गए हम लोग

सैफ़ बिजनोरी

फ़िक्र-ए-ज़र में बिलकता हुआ आदमी

साहिर शेवी

ताज-महल

साहिर लुधियानवी

मेरे गीत तुम्हारे हैं

साहिर लुधियानवी

ख़ूबसूरत मोड़

साहिर लुधियानवी

जश्न-ए-ग़ालिब

साहिर लुधियानवी

दीवारों का जंगल जिस का आबादी है नाम

साहिर लुधियानवी

धरती की सुलगती छाती से बेचैन शरारे पूछते हैं

साहिर लुधियानवी

तोड़ लेंगे हर इक शय से रिश्ता तोड़ देने की नौबत तो आए

साहिर लुधियानवी

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

साहिर लुधियानवी

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